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एनटीपीसी में कोयले का संकट, एक और यूनिट ठप

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फोटो संख्या 25
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एनटीपीसी में कोयले का संकट, एक और यूनिट ठप
- बिजली उत्पादन कम होने से कई प्रदेशंों में आपूर्ति पर पड़ रहा असर
- पहले 500 मेगावाट की छह, मरम्मत के लिए अब 210 मेगावाट की दो नंबर यूूनिट बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊंचाहार (रायबरेली)। एनटीपीसी परियोजना ऊंचाहार में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। यही वजह है कि कोयले की कमी से एक और यूनिट को बंद कर दिया गया है। चार दिन पहले छह नंबर यूनिट को बंद किया गया था। अब तक दो यूनिटें बंद हो चुकी हैं। कोयला संकट का यही हाल रहा तो बाकी यूनिटों पर असर पड़ सकता है। यूनिटें पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं कर पा रही हैं। हालांकि प्रबंधन दो नंबर यूनिट को मरम्मत के लिए बंद करने का दावा कर रहा है।
एनटीपीसी परियोजना ऊंचाहार में पांच यूनिटें 210 मेगावाट, जबकि छह नंबर यूनिट 500 मेगावाट बिजली उत्पादन करती है। पिछले माह से मांग के सापेक्ष कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसकी वजह से गुरुवार को परियोजना की सबसे ज्यादा 500 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाली यूनिट नंबर छह को बंद कर दिया गया था। परियोजना की 210 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता वाली यूनिट नंबर शनिवार की रात 12 बजे बंद कर दी गई। कोयले की आपूर्ति न होने से परियोजना की सभी यूनिटों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। यदि ऐसा होता है तो आपूर्ति वाले राज्यंो में बिजली का संकट और गहरा जाएगा।
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इनसेट
इन राज्यंों में बढ़ सकता बिजली संकट
परियोजना से उत्तर प्रदेश के अलावा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली व उत्तराखंड को बिजली सप्लाई की जा रही है। दो यूनिटें बंद होने से एनटीपीसी ऊंचाहार से 1550 मेगावाट बिजली उत्पादन के बजाय 840 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। सूत्रंो का कहना है कि जो यूनिटें चल रही हैं, वह भी कोयले की कमी के कारण पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं।
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24 घंटे में 25 हजार टन कोयले की जरूरत
एनटीपीसी परियोजना की सभी यूनिटों को एक साथ चलाने के लिए 24 घंटे में करीब 25 हजार टन कोयले की जरूरत पड़ती है। विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए परियोजना में एक माह के लिए लगभग आठ लाख टन कोयला स्टाक में रखा जाता है, लेकिन इस समय परियोजना में कुछ दिन का स्टाक बचा है। मांग के सापेक्ष कोयले की आपूर्ति न होकर मात्र 10 से 15 हजार टन ही आपूर्ति हो पा रही है।
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दो हफ्ते में हो सकती है आपूर्ति सामान्य
एनटीपीसी परियोजना में झारखंड से कोयले की आपूर्ति होती है। कोयला सप्लाई में लगी दो कंपनियों से परियोजना का कोयला आपूर्ति का अनुबंध है। बारिश की वजह कोयले की खदानों में पानी भर गया है। बहुत ही कम मात्रा में कोयला निकल पा रहा है। परियोजना अधिकारियों ने कोयला आपूर्ति करने वाली कंपनियों के साथ पत्राचार किया है। लगभग दो हफ्ते में कोयले की आपूर्ति सामान्य होने की बात कही जा रही है। परियोजना में कोयला लेकर आने वाली मालगाड़ी में 58 वैगन लगे होते हैं। मालगाड़ी के एक वैगन में लगभग 50-60 मीट्रिक टन कोयला भरा होता है। पिछले माह तक प्रतिदिन 5-6 मालगाड़ियां कोयला लेकर आती थीं, जिनसे लगभग 30 हजार टन कोयले की आपूर्ति हो रही थी, लेकिन अब औसतन 10 हजार टन कोयला ही परियोजना पहुंच रहा है।
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इनसेट
कोयले का संकट पूरे देश में है। खदानों में बारिश की वजह से पानी भर गया है, जिससे आपूर्ति प्रभावित है। अगले हफ्ते परियोजना में कोयले की आपूर्ति सुचार रूप से शुरू करने की संभावना है। यूनिट नंबर दो मेंटीनेंस के लिए बंद की गई है। मेंटीनेंस के बाद यूनिट को चलाया जाएगा।
कमलेश सोनी, महाप्रबंधक, एनटीपीसी ऊंचाहार
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