रायबरेली। बीती पांच अगस्त को अधूरी परियोजनाओं और विकास कार्यों की समीक्षा में डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने मात्र चार महीने में 3047 हैंडपंपों की रिबोरिंग का मामला सामने आने पर जांच का आदेश दिया था। इसके बावजूद अब तक जांच शुरू नहीं हो पाई। पंचायतीराज विभाग के पास डाटा ऑनलाइन उपलब्ध होने के बाद भी मामला दबाने का प्रयास चल रहा है।
उप मुख्यमंत्री व जिले के प्रभारी डॉ. दिनेश शर्मा ने गत पांच अगस्त को बचत भवन में विकास और अधूरे कार्यों की समीक्षा की थी। इस दौरान डिप्टी सीएम को पता लगा कि पिछली अप्रैल से अब तक जिले में 3047 हैंडपंप रिबोर किए गए हैं। इसमें करीब 8.37 करोड़ का भुगतान भी हुआ है।
कम समय में इतने अधिक हैंडपंपों की रिबोरिंग की पोल खुलते ही डिप्टी सीएम ने जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने रिबोरिंग की संस्तुति करने वाले अधिकारियों की रिपोर्ट भी जांच में शामिल करने के आदेश दिए थे।
डिप्टी सीएम के आदेश को 10 दिन बीतने वाले हैं, लेकिन अधिकारियों ने आदेश दरकिनार कर दिया है। ग्राम पंचायतों में हैंडपंपों की रिबोरिंग और मरम्मत से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध है।
यदि गड़बड़ी भी की गई है तो भी पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों की ही जिम्मेदारी है, लेकिन कई ब्लॉकों में बिना रिबोर कराए ही रुपये डकारने के मामले प्रकाश में आने के बाद भी अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है। जिले में प्रशासक ने गांवों में भुगतान के नाम पर जमकर मनमानी की है।
डीपीआरओ ने मांगी रिपोर्ट, एडीओ ने नहीं दी
पिछले सप्ताह ही जिला पंचायतराज अधिकारी उमाशंकर मिश्रा ने सभी एडीओ पंचायत को चार माह में हैंडपंपों की रिबोरिंग के संबंध में रिपोर्ट देने के लिए कहा था, लेकिन अब तक रिपोर्ट डीपीआरओ को नहीं मिली है। डीपीआरओ का कहना है कि एडीओ से हैंडपंपों के संबंध में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी।
हैंडपंपों की रिबोरिंग के मामले में जल्द ही जांच के लिए टीमें बनाई जाएंगी। अभी छह अगस्त को ही ज्वाइन किया है। मामले को दिखवाकर जांच करवाई जाएगी। रिबोरिंग में गड़बड़ी मिलने पर संबंधितों पर कार्रवाई की जाएगी।
- ईशा प्रिया, सीडीओ