रायबरेली में रविवार को सलोन तहसील क्षेत्र के धरई गांव स्थित वन विभाग की आरक्षित जमीन पर इस तरह लोगों ने कब्जा कर कराई जा रही खेती।
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वन विभाग के अफसरों की अंधेरगर्दी के चलते सलोन तहसील क्षेत्र के धरई गांव में लाखों रुपये कीमत की सरकारी जमीन पर लोगों ने कब्जा कर घर बना लिए हैं तो कहीं खेती की जा रही है। मौजूदा समय में इस जमीन पर धान की रोपाई कराई गई है। सालों से यह सब होता रहा और विभाग के जिम्मेदार आंखें मूंदे हुए हैं।
रायबरेली शहर से 20 किमी दूर धरई गांव के पास ही वन विभाग की करीब 20 बीघा से अधिक जमीन है। मौैजूदा समय में इस जमीन की कीमत लाखों रुपये है। करीब सात बीघा वन भूमि पर कुछ दबंगों ने कब्जा करके मकान बना लिए हैं तो कुछ फसलों की बोआई कर रहे हैं।
मौजूदा समय में विभाग की जमीन पर धान की रोपाई करा दी गई है। खास बात ये है कि सलोन में रेंजर कार्यालय भी है। जहां रेंजर के साथ ही अन्य स्टाफ की तैनाती है। बावजूद इसके जमीन पर आशियानों का निर्माण और फसलों की बोआई कराई जा रही है। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो विभागीय अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत का नतीजा है कि दबंगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया है।
क्षेत्रीय लोगों की मानें तो धरई रोड वाली जमीन पर ही सबसे अधिक कब्जा है। एक बीघा जमीन की कीमत 10 से 12 लाख रुपये है। ऐसे में कब्जा की गई जमीन 70 लाख से अधिक की है। रेंजर कार्यालय होने के बाद भी कब्जा होना अफसरों की लापरवाही साबित कर रही है। निश्चित तौर से इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक के अफसर शामिल हैं। बिना उनके इशारे पर ऐसा करना मुमकिन नहीं था।
डीएफओ उमाशंकर दोहरे ने बताया कि सलोन तहसील क्षेत्र के धरई स्थित वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत मिली थी। इस पर तहसील और विभाग की ओर से एक चक्र का ज्वाइंट सर्वे का कार्य पूरा हो गया है। दूसरे चक्र का भी सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे पूरा होने पर अवैध कब्जा हटवाकर संबंधित लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
डीएम सूर्यपाल गंगवार ने बताया कि वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा करके मकान निर्माण और फसलों की बोआई करने का मामला जानकारी में नहीं है। वन विभाग के अफसरों से पूछताछ करके जांच कराई जाएगी। साथ ही ऐसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।