रायबरेली। रोडवेज की बसों में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों के सहारे यात्रा करने पर अंकुश लगाने के लिए सोमवार को परिवहन विभाग की टीमों ने शहर के सभी पांच हाईवे पर टीमें भेजकर बसों की चेकिंग कराई।
पूर्व में पांच जाली प्रमाणपत्र पकड़े जाने के बाद सोमवार को भी टीम ने पांच संदिग्ध दिव्यांग प्रमाणपत्र पकड़े हैं। प्रमाणपत्रों को जांच के लिए सीएमओ को भेजा गया है। साथ ही संबंधित यात्रियों का मौके पर ही कंडक्टर से टिकट बनवाया गया। अभियान शुरू किए जाने के बाद से हड़कंप मच गया है।
20 सितंबर को सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अक्षय कुमार ने सरेनी की ओर से आ रही बस को चेक किया था। बस में छह लोग ऐसे मिले जिन्होंने टिकट नहीं लिया था। दिव्यांग प्रमाणपत्र दिखाकर यात्रा कर रहे थे। एआरएम ने पांचों लोगों के दिव्यांग प्रमाणपत्र जब्त कर जांच के लिए सीएमओ को पत्र भेजा था। पांचों लोग शारीरिक रूप से स्वस्थ मिले थे लेकिन सभी को प्रमाणपत्र जारी किए गए थे।
एआरएम ने सभी रूटों पर ऐसे यात्रियों को पकड़ने के बाद टीमें गठित कर दी। सोमवार को टीमों ने कानपुर, लखनऊ, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर और प्रयागराज हाईवे से निकलीं बसों को चेक किया। पांच ऐसे यात्री मिले जो शारीरिक रूप से स्वस्थ दिखे लेकिन उनके पास दिव्यांग प्रमाणपत्र मिले। टीमों ने प्रमाणपत्रों को जब्त करके तत्काल कंडक्टर से यात्रियों का टिकट बनवा दिया।
एआरएम अक्षय कुमार ने बताया कि सोमवार को टीमों के माध्यम से सभी रूटों पर बसों की चेकिंग कराई गई। इस दौरान पांच संदिग्ध दिव्यांग प्रमाणपत्र मिले हैं। प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच के लिए पत्र सीएमओ को भेजा गया है। जल्द ही रिपोर्ट मिलने पर मामले में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।