रायबरेली। मांगों को लेकर रविवार रात 12 बजे से 108 और 102 एंबुलेंस चालकों का गुस्सा भड़क गया। शहर के गोराबाजार में एंबुलेंस खड़ी करके जमकर प्रदर्शन किया।
अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर चालकों व ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) को समझाने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बनी तो अधिकारी वापस लौट गए। चालकों ने मांगे पूरी होने के बाद ही एंबुलेंस सेवा बहाल किए जाने की चेतावनी दी। इस दौरान दिनभर मरीजों को एंबुलेंस सेवा के लिए बेहाल होना पड़ा।
एंबुलेंस की एएलएस सेवा नई कंपनी जिगित्सा को सौंपी गई है। आरोप है कि यह कंपनी नए सिरे से भर्ती कर रही है। इसे लेकर पहले से कार्यरत कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। कई दौर की बातचीत के बाद भी समझौता न होने पर एएलएस एंबुलेंस कर्मचारियों के समर्थन में 102 और 108 एंबुलेंस कर्मियों ने भी रात से हड़ताल शुरू कर दी।
शहर के गोराबाजार स्थित मैदान में सभी एंबुलेंस खड़ी कर दी गईं। एंबुलेंस चालकों व ईएमटी ने जमकर प्रदर्शन करके मांगें पूरी किए जाने की मांग की। जीवनदायिनी स्वास्थ्य विभाग 108 व 102 एंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अतुल सिंह, मंत्री भानू सिंह ने कहा कि एएलएस के कर्मचारियों को हटाया न जाएं। नई कंपनी जिम्मेदार कर्मचारियों को काम से न हटाए।
एंबुलेंस कर्मचारियों ने यह भी कहा कि कोरोना काल में जान गंवाने वाले कर्मचारियों को 50 लाख की मदद दिलाने के साथ ही ठेकेदारी प्रथा को खत्म करके एंबुलेंस कर्मियों को एनएचएम में समायोजित किया जाए। एंबुलेंस कर्मियों को पहले की तरह ही मानदेय दिया जाए। उनसे किसी तरह का बांड न भराया जाए।
एंबुलेंस सेवा ठप होने से स्वास्थ्य व जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। सीओ सिटी, एसडीएम सदर सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर चालकों व ईएमटी को समझाने का प्रयास किया। हालांकि हड़ताल खत्म करने को कोई राजी नहीं हुआ।
सीएमओ ने भी हड़ताल खत्म कराने का विफल प्रयास किया। एंबुलेंस कर्मचारी आशुतोष तिवारी, मो. हारुन व एसबी सिंह आदि ने मांगे पूरी होने के बाद एंबुलेंस सेवा शुरू करने की चेतावनी दी।
जीवीके के जिला प्रभारी अमित मिश्रा ने बताया कि जिले में 102 और 108 एंबुलेंसों को चालकों व ईएमटी ने गोरा बाजार में खड़ी कर दी है। हालांकि इमरजेंसी के लिए छह एंबुलेंस दी गई हैं। इन्हीं एंबुलेंस से गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। दिनभर में पांच मरीजों को ही एंबुलेंस से लखनऊ भेजा गया है।
हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी तक मरीजों को पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सेवा नहीं मिल पायी। एंबुलेंस संघ के जिलाध्यक्ष अतुल सिंह ने बताया कि गंभीर मरीजों के लिए छह एंबुलेंसों का संचालन कराया गया है। मरीजों को कोई नुकसान न हो, इसके लिए यह निर्णय लिया गया है।
जिले की सीएचसी में औसतन 10 मरीजों को रोजाना एंबुलेंस सेवा मिलती है। कभी-कभी तो यह संख्या दूनी तक पहुंच जाती है। हालांकि सोमवार को मरीजों को अपने साधनों से ही अस्पताल पहुंचना पड़ा क्योंकि छह एंबुलेंस केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए जिला मुख्यालय पर उपलब्ध कराई गई थीं। ऐसे में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि एंबुलेंस चालकों की हड़ताल से मरीजों को सुचारु रूप से सेवा नहीं मिल सकी है। गनीमत रही कि छह एंबुलेंसों का संचालन होने से गंभीर मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाया गया है।