रायबरेली। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अक्षय कुमार की बसों की चेकिंग के दौरान बरामद पांचों दिव्यांगता प्रमाणपत्र पड़ताल के बाद अवैध घोषित कर दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने इन प्रमाणपत्रों को जारी करने से इंकार कर दिया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के एक रिटायर्ड बाबू के ही गोरखधंधे में शामिल होने की आशंका है। जल्द ही फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के सहारे रोडवेज की बस में यात्रा करने वालों पर मुकदमा दर्ज होगा।
20 सितंबर को एआरएम ने सरेनी की ओर से आ रही बस को चेक किया। बस में पांच लोग ऐसे मिले, जिन्होंने टिकट नहीं लिया था। ये लोग दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिखाकर यात्रा कर रहे थे।
एआरएम ने पांचों दिव्यांगता प्रमाणपत्र जब्त कर लिए थे। उन्होंने अजय शंकर, अंकित कुमार सिंह, अनुपम कुमार, रीना सिंह, गोविंद शुक्ला के नाम से बनाए गए दिव्यांगता कार्डों की जांच के लिए सीएमओ को पत्र भेजा था। स्वास्थ्य विभाग के यूडीआई जनरेटर अनुक्रांत आनंद ने सभी कार्ड नंबरों की ऑनलाइन जांच की।
जांच में पांचों कार्ड फर्जी पाए गए। उनका कहना है कि पांचों कार्ड नंबर ऑनलाइन या मैनुअल जारी नहीं किए गए हैं। किसी साइबर कैफे से यहे कार्ड बनाए गए हैं।
जांच के बाद सीएमओ ने सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक को दिव्यांगता प्रमाणपत्रों के फर्जी होने के संबंध में पत्र भी भेजा है। एआरएम अक्षय कुमार ने बताया कि सीएमओ का पत्र आते ही संबंधितों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
शुरू में ही सभी कार्ड फर्जी प्रतीत हो रहे थे, क्योंकि पांचों यात्री पूरी तरह से स्वस्थ थे, लेकिन उनके पास दिव्यांगता का प्रमाणपत्र था। यात्रियों ने स्वास्थ्य विभाग के एक रिटायर्ड बाबू का नाम चेकिंग के दौरान लिया था। बाबू पर ही कार्ड जारी करने का आरोप लगाया था। हालांकि फर्जीवाडे़ की पुष्टि होने के बाद हड़कंप मच गया है।