रायबरेली। लखीमपुर खीरी कांड को लेकर रेल रोको आंदोलन के किए गए ऐलान के तहत सोमवार को 12 किसान नेता न सिर्फ नजरबंद करा दिए गए बल्कि रेलवे स्टेशनों की कड़ी किलेबंदी भी की गई। पुलिस की सख्ती के चलते कोई भी किसान नेता जिला मुख्यालय या फिर स्थानीय रेलवे स्टेशन तक नहीं पहुंच सका। इस बीच किसान नेताओं ने कहा कि उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वे चुप नहीं रहेंगे। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
किसान नेताओं के रेल रोको आंदोलन को लेकर पुलिस चौकन्नी रही। जिला मुख्यालय के चौराहों पर पुलिस तैनात की गई थी। सीओ सदर महिपाल पाठक, कोतवाल अतुल सिंह की अगुवाई में पुलिस रेलवे स्टेशन पर गश्त करती रही। पूरे जिले में 12 किसान नेताओं को नजरबंद किया गया।
मिल एरिया थाना क्षेत्र के मलिकमऊ निवासी किसान नेता लाला चौधरी को घर पर ही नजरबंद कर दिया गया। इसके अलावा शिवगढ़ थाना क्षेत्र में किसान नेता संगमलाल, आलोक वर्मा, पुण्यवासी को भी नजरबंद किया गया। थानेदार जितेंद्र मोहन सरोज ने बताया कि आंदोलन को देखते हुए किसान नेताओं को नजरबंद किया गया।
डलमऊ में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आह्वान पर जिलामंत्री मनोज यादव की अगुवाई में किसानों का डलमऊ रेलवे स्टेशन पर रेल रोको अभियान को सफल बनाने का कार्यक्रम था। इसे लेकर उपजिलाधिकारी अंशिका दीक्षित, कोतवाल पंकज त्रिपाठी एवं खंड विकास अधिकारी डलमऊ रिचा सिंह ने सोमवार सुबह रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करा दी।
किसान नेताओं को घरों पर नजरबंद कर दिया गया। जिलामंत्री मनोज यादव को जोहवानटकी गांव स्थित घर में नजरबंद किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की स्वाधीनता को पुलिस से दबवाने का काम कर रही है। लखीमपुर खीरी कांड में गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा की तत्काल बर्खास्तगी की जाए। किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सुशील यादव ने कहा कि सरकार की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी।
श्रीराजनगर, बछरावां व कुंदनगंज रेलवे स्टेशन पर पुलिस, आरपीएफ व पीएसी के जवान तैनात रहे। कोतवाल राकेश सिंह ने बताया कि क्षेत्रीय किसान नेता शंकर रावत व पुष्पेंद्र पाल को नजरबंद किया गया। इसके साथ ही बातचीत कर समस्या का समाधान निकाला गया। किसी भी प्रकार के व्यवधान की आशंका नहीं रही।
अपर पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि रेल रोको आंदोलन के मद्देनजर जिले में सतर्कता बरती गई। 12 किसान नेताओं को नजरबंद कराया गया। रेलवे स्टेशनों पर पुलिस तैनात की गई। किसानों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी बात को सरकार तक पहुंचाया जाएगा।