काफी ताकत लगाने के बाद भी कुंडा व बाबागंज में बसपा प्रत्याशियों को हार का मुंह देेखना पड़ा था। वर्ष 2012 के चुनाव में भी सपा ने कुंडा व बाबागंज सीट पर राजाभैया व विनोद सरोज को समर्थन दे दिया। इस बार प्रदेश में सपा की सरकार बनी और राजाभैया मंत्री भी बने। 2017 के चुनाव में भी सपा ने दोनों विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारे। हालांकि इस बार सूबे में भाजपा की सरकार बनी।
2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राजाभैया ने अपनी पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का गठन कर लिया। इस बीच राज्यसभा चुनाव में मतदान को लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव व राजाभैया के बीच दूरी बन गई। लोकसभा चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज के समर्थन में आयोजित चुनावी जनसभा में राजाभैया के खिलाफ बयानबाजी की थी। लोकसभा चुनाव के बाद सपा नेतृत्व की निगाहें एक बार फिर कुंडा व बाबागंज पर गड़ गईं।
सपा अध्यक्ष ने कुंडा नगर पंचायत की चेयरमैन के देवर छविनाथ यादव को जिले की कमान सौंपते हुए दोनों विधानसभाओं में बूथ कमेटी के गठन का निर्देश दिया। बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए करीब एक साल से छविनाथ यादव लगातार प्रयास कर रहे हैं। हालांकि मौजूदा समय में सपा जिलाध्यक्ष छविनाथ यादव जेल में हैं, मगर उनके भाई कुुंडा के पूर्व चेयरमैन गुलशन यादव क्षेत्र में सक्रिय हैं।
कुंडा में राजाभैया व बाबागंज विधानसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे विनोद सरोज को टक्कर देने के लिए सपा रणनीति के तहत काम कर रही है। अब सपा की रणनीति कितनी कारगर हो सकेगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।