यूपी बोर्ड ने रिजल्ट तो घोषित कर दिया, लेकिन अभी तक छात्र-छात्राओं के परीक्षा शुल्क के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। जिले के हाईस्कूल और इंटर के कुल 1118081 परीक्षार्थियों ने परीक्षा के लिए कुल 6.12 करोड़ से अधिक की राशि जमा की थी। बगैर परीक्षा कराए परिणाम जारी होने के बाद अब परीक्षार्थी शुल्क वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
इस बार यूपी बोर्ड में हाईस्कूल में 60061 व इंटर में 51826 परीक्षार्थियों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था। आवेदन करते समय परीक्षार्थियों से परीक्षा शुल्क भी जमा करवाया गया था। परीक्षा शुल्क के तौर पर हाईस्कूल के विद्यार्थियों से 501 व इंटर के परीक्षार्थियों से 601 रुपये लिए गए थे। हाईस्कूल के छात्रों ने 30090561 व इंटर के परीक्षार्थियों ने 31147426 रुपये परीक्षा शुल्क के तौर पर जमा किए थे। इस तरह से परीक्षार्थियों से कुल 6.12 करोड़ रुपये शुल्क के नाम पर वसूले गए थे।
कोरोना संक्रमण के कारण परीक्षा स्थगित कर दी गई। बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटर के परीक्षार्थियों को अगली कक्षा के लिए प्रमोट करने के लिए निर्णय लिया। इससे इस बार बोर्ड परीक्षा नहीं हो सकी। बगैर बोर्ड परीक्षा के परिणाम जारी कर दिया गया। परीक्षा शुल्क वापस करने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
ऐसे में छात्र-छात्राओं के साथ उनके अभिभावकों में भी संशय बना हुआ है कि परीक्षा शुल्क वापस होगा या नहीं। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. सर्वदानंद ने बताया कि परीक्षा शुल्क से संबंधित किसी तरह का आदेश अभी तक नहीं मिला है। जो भी आदेश बोर्ड से प्राप्त होगा, उसका पालन किया जाएगा।
ऐसे खर्च की जाती है परीक्षा शुल्क की धनराशि
विभागीय अधिकारियों के अनुसार परीक्षा शुल्क की राशि परीक्षा के कार्यों में खर्च की जाती है। इस राशि से परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं प्रिंट कराई जाती हैं। परीक्षा कार्यों में लगे कर्मचारियों को मानदेय भी दिया जाता है। वाहन खर्च भी उठाया जाता है।