जिले के शिक्षित बेरोजगारों को रोजगार मुहैया कराने में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पूरी तरह फेल रही है। वर्ष 2013 में प्रारंभ हुई इस योजना के तहत जिले के 13,114 लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया गया। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि प्रशिक्षण लेने वाले 1934 लोगों को रोजगार मिल गया है।
जिले की पांच तहसीलों में 17 केंद्रों पर प्रधानमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण मिशन योजना के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन केंद्रों पर प्रशिक्षण लेने वाले युवक और युवतियों में विभिन्न ट्रेडों में ट्रेनिंग देकर रोजगार हासिल करने का हुनर विकसित किया जाता है। तीन से छह माह का प्रशिक्षण लेने युवक-युवतियों को विभागीय स्तर से कोई रोजगार नहीं दिया जाता है, बल्कि उन्हें स्वयं इसके लिए प्रयास करने को कहा जाता है।
आलम यह है कि ट्रेनिंग लेने के बाद भी रोजगार के अभाव में युवा में भटक रहे हैं। वर्ष 2013 में प्रारंभ हुई इस योजना के तहत अभी तक 13,114 लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया गया, मगर जिस उद्देश्य के लिए यह योजना प्रारंभ की गई, वह सार्थक नहीं हो पाई। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि प्रशिक्षण लेने वाले 1934 युवाओं को रोजगार मिल चुका है, मगर खुद विभाग के पास इन लोगों का डाटा उपलब्ध नहीं है।
नौ ट्रेड में दिया जाता है प्रशिक्षण
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, हैंडीक्रॉफ्ट, गारमेंट्स, हेल्थ केयर, रिटेलर, सिक्योरिटी मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी जाती है ।इन ट्रेडों में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवक-युवतियों को रोजगार मुहैया कराने के लिए अफसरों की ओर से कोई पहल नहीं की जाती है। यही वजह है कि योजना सफल नहीं हो रही है।
प्राइवेट संस्थाओं के हाथ में ट्रेनिंग की जिम्मेदारी
प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी प्राइवेट संस्थाओं को सौंप दी गई है। जिनके पास स्वयं के प्रशिक्षक नहीं हैं। प्रशिक्षण देने के लिए एक भी सरकारी केंद्र नहीं खुले हैं। इससे सही ढंग से न तो प्रशिक्षण मिल रहा है और न ही वह अपने मिशन में सफल हो पा रहे हैं।
जिले में 17 केंद्रों पर चयनित युवक-युवतियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें अभी तक 1934 लोगों को स्वरोजगार मिल चुका है। दो साल तक कोरोना काल का दौर चलने से वास्तविक डाटा अभी उपलब्ध नहीं है। वंदना सिंह, जिला प्रबंधक, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना