जिले के 2032 प्राइमरी, 722 मिडिल और 160 सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 2,83,475 बच्चों की पढ़ाई में पुस्तक बाधा बन गई है। बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूलों तक पहुंचने वाली पुस्तक की खेप अभी जिले में आई ही नहीं है।
जिले के कक्षा छह से आठ तक के स्कूल खुल गए हैं और कक्षा एक से पांच तक के स्कूल एक सितंबर से खुलने जा रहे हैं। जिले के स्कूल तो खुल गए हैं, मगर बच्चों को पढ़ने के लिए पुस्तक ही नहीं आई है। शीर्ष अफसरों का कहना है कि पुस्तक वितरण में अध्यापकों की लापरवाही नहीं है, बल्कि कोरोना संक्रमण की वजह से छपने के लिए एजेंसियों को आदेश निर्गत करने में देरी करने से ऐसी स्थित बनी है।
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जिले के 2032 प्राइमरी, 722 मिडिल और 160 सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले 2,83,475 बच्चों की पढ़ाई में पुस्तक बाधा बन गई है। बेसिक शिक्षा विभाग से स्कूलों तक पहुंचने वाली पुस्तक की खेप अभी जिले में आई ही नहीं है। ऐसी दशा में स्कूल आने वाले बच्चों को अध्यापक कैसे पढ़ाएं । इसे लेकर संशय बना हुआ है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार नई पुस्तक के पाठ्यक्रम में व्यापक परिवर्तन हुआ है। कक्षा सात के विज्ञान की पुस्तक में कोविड -19 का पाठ शामिल किया गया है।
कोरोना से बचाव, लक्षण के साथ सावधानियां बरतने के टिप्स भी दिए गए हैं, मगर दुर्भाग्य यह है कि पुस्तक नहीं आने से स्कूल खुलने के बाद भी पढ़ाई नहीं प्रारंभ हो पा रही है। स्कूल आने वाले बच्चे अध्यापकों से पुस्तक मांग रहे हैं। अध्यापक खंड शिक्षा अधिकारियों को फोन कर बच्चों की शिकायत दर्ज करा रहे हैं। शिक्षा सत्र के चार माह बीत गए हैं, मगर बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों को पुस्तक मुहैया कराने में पूरी तरह फेल है। अफसरों का कहना है कि पुस्तक जल्द मिलने के आसार भी नहीं हैं।
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बाजार में नहीं मिलतीं हैं पुस्तकें
प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के बच्चों को नि:शुल्क वितरित की जाने वालीं पुस्तकें बाजार में नहीं मिलती हैं। इसकी वजह यह है कि विभाग में आने के बाद इनकी मांग खत्म हो जाती है और दुकानदार से कोई नहीं लेता है। कांवेंट स्कूलों ने अलग-अलग पुस्तकें लगा रखी हैं। ऐसे में विभाग के अलावा पुस्तक मिलने का कोई और रास्ता नहीं है।
सितंबर माह के अंतिम सप्ताह तक मिलने की है उम्मीद
सितंबर माह के अंतिम सप्ताह तक बच्चों को पुस्तकें मिलने की उम्मीद है। अगर सितंबर माह के दूसरे सप्ताह में पुस्तकें आती हैं, तो जिले के 17 ब्लॉकों के बीआरसी पर भेजवाना और स्कूलों में वितरण कराने में पूरा माह लग जाएगा।
जिले में पुस्तकों की खेप आनी प्रारंभ हो गई है। अगले माह तक पूरी पुस्तकें आने के बाद बीआरसी भेजकर बच्चों को वितरित कराई जाएंगी। स्कूल आने वाले बच्चों को पुरानी पुस्तकों से पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही बच्चों के हाथों में पुस्तकें पहुंच जाएंगी। -सुधीर कुमार सिंह, प्रभारी बीएसए