दिवाली पर सरसों और तिल के तेल के साथ ही देशी घी पर छाई महंगाई से लोग मिट्टी के दीये जलाने से दूर भाग रहे हैं। ज्यादातर लोग मोमबत्ती और इलेक्ट्रॉनिक झालरों की खरीदारी कर रहे हैं। खुले बाजार में सरसों का तेल 190 रुपये लीटर, तिल का तेल 320 रुपये लीटर जबकि देसी घी 800 रुपये किलो बिक रहा है। लोगों का कहना है कि घरों में सिर्फ पूजा के लिए दीपक जलाए जाएंगे।
खाद्य तेलों पर छाई महंगाई ने दिवाली का मजा किरकिरा कर दिया है। दिवाली पर प्राय: शहर और गांव के लोग सरसों के तेल के दीये जलाते हैं, मगर इस वर्ष तेल महंगा होने के कारण अधिकांश लोग इलेक्ट्रानिक झालरों और मोमबत्ती की खरीदारी कर रहे हैं। सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाने के लिए एक दीये में लगभग 20 ग्राम तेल की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार एक लीटर तेल में अधिकतम 50 दीये जलाए जा सकते हैं। इसके अलावा रूई की भी जरूरत पड़ती है।
जबकि मोमबत्ती का पैकेट 20 रुपये में मिल रहा है, जिसमें 30 मोमबत्तियां होती हैं। मोमबत्ती के दो पैकेट लेने पर ग्राहकों को 40 रुपये अदा करने पड़ रहे हैं। जिसमें 60 मोमबत्तियां मिल रही हैं। इस प्रकार सरसों के तेल के मुकाबले एक चौथाई दाम में घर को रोशन करने का कार्य पूरा हो रहा है। यही वजह है कि शहर और गांव के लोग मिट्टी के बर्तन में दीपक जलाने के बजाए मोमबत्तियों से घर रोशन करने की तैयारी कर रहे हैं।
शहर के दहिलामऊ निवासी राकेश ने बताया कि इस बार सरसों का तेल और घी महंगा होने के कारण मोमबत्तियों और बिजली के झालरों का इस्तेमाल किया जाएगा। मिट्टी के दीये सिर्फ पूजा में इस्तेमाल किए जाएंगे। इसी तरह पल्टर बाजर निवासी रागिनी, टक्करगंज निवासी रीना का भी कहना है कि इस बार दीपावली पर बिजली के झालरों और मोमबत्तियों से ही सजावट की जाएगी।
पिछले साल के मुकाबले 80 रुपये बढ़ गए दाम
पिछले वर्ष दीपावली पर सरसों का तेल 110 रुपये प्रति लीटर की दर से बिका था। इस वर्ष भाव बढ़कर 190 रुपये हो गए हैं। महंगाई के चलते सामान्य परिवारों के लिए तेल खरीदकर खाना ही भारी पड़ रहा है। एक साल में एक लीटर सरसों के तेल में 80 रुपये का इजाफा हुआ है। ऐसे में लोग सरसों के तेल से मिट्टी के दीये जलाने से परहेज कर रहे हैं।
बोले कारीगर, दीपक सस्ते, तेल महंगा
दीये बनाने वाले दहिलामऊ के शंकरलाल प्रजापति ने बताया कि इस बार उन्होंने हजारों दीपक तैयार किए हैं, लेकिन आर्डर नहीं आ रहे हैं। मांग कम होने से इस वर्ष दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। मिट्टी के दीये पिछले साल पचास रुपये सैकड़ा बेचे गए। इस बार भी वही रेट है। जबकि तेल के दाम लगभग दूने पर पहुंच गए हैं। इसी तरह झगरू प्रजापति और हरीराम प्रजापति ने बताया कि तेल महंगा होने के कारण लोग मोमबत्ती अधिक पसंद कर रहे हैं। दहिलामऊ के भगवती प्रसाद ने बताया कि न के बराबर आर्डर मिले हैं। दो महीने से दीये तैयार किए जा रहे हैं। ऐसे में लागत निकल पाना भी मुश्किल है।