बीते पांच जिले में खटारा हो चुकी रोडवेज बसों की मरम्मत के लिए वर्कशॉप के लिए निगम के अफसरों को खोजे जमीन नहीं मिल रही है। पांच साल पहले शासन ने मॉडल बस स्टैंड के साथ वर्कशॉप निर्माण के लिए हरी झंडी दी थी। पांच साल बीत जाने के बाद भी अफसर जमीन की तलाश नहीं कर पाए। ऐसे में बसों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। जरूरत के समय यात्रियों को विभाग बसें नहीं मुहैया करा पा रहा है।
पांच साल पहले सपा शासनकाल में जिले को मॉडल बस स्टैंड के साथ वर्कशॉप निर्माण के लिए शासन ने हरी झंडी दी थी। बस स्टैंड को मॉडल स्टेशन का दर्जा दे दिया गया है, लेकिन वर्कशॉप के लिए अफसरों को जमीन नहीं मिल सकी। ऐसे में जिले में वर्कशॉप का निर्माण नहीं हो सका।
बीच में जिलाधिकारी से मिलकर तत्कालीन एआरएम रवींद्र कुमार सिंह ने डिपो से सटी सरकारी जमीन में वर्कशॉप का संचालन शुरू करा दिया था, मगर मॉडल बस स्टैंड के संचालन के बाद उस जमीन को रोडवेज विभाग के अफसरों को खाली करना पड़ा। ऐसे में अब विभाग के पास बसों की मरम्मत के लिए वर्कशॉप नहीं है। जबकि जिले की ज्यादातर रोडवेज बसें खटारा हो चुकी हैं। वर्कशॉप न होने के कारण उनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। ऐसे में यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है।
वर्कशॉप के लिए जमीन कई स्थानों पर देखी गई। दूर होने के कारण वहां वर्कशॉप नहीं बन सका। जल्द ही जमीन के लिए जिला प्रशासन को पत्राचार किया जाएगा। पीके कटिहार, एआरएम, रोडवेज