419 हेक्टेयर भूमि हो चुकी है अधिग्रहित
अब तक जिला प्रशासन 419 हेक्टेअर जमीन अधिग्रहीत कर चुका है। इसके सापेक्ष 415 करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा जा चुका है। एक्सप्रेस-वे बनने के बाद प्रभावित गांवों की तस्वीर बदलने वाली है। इन गांवों में परियोजना के माध्यम से व्यवसाय के अवसर बढ़ेंगे। आम लोगों को न सिर्फ रोजगार मिलेगा, बल्कि सुविधाएं व संसाधन भी बढ़ जाएंगे। परियोजना के माध्यम से शासन अस्पताल, रेस्टोरेंट, होटल के साथ ही दुकानें भी खुलवाएगा। विभागीय अफसरों के अनुसार अधिग्रहीत जमीन को लोगों को लीज पर दिया जाएगा। लीज पर जमीन लेकर लोग अपना व्यवसाय कर सकेंगे।
विवादित मामलों में कोर्ट में जमा होगी धनराशि
गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण में उन जमीनों का मालिकाना हक निर्धारण करने में अधिकारी अपना समय नहीं गवाएंगे, जो विवादित हैं और जिनका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। अधिकारियों ने फैसला किया है कि विवादित जमीन के मुआवजे की राशि कोर्ट में जमा कर दी जाएगी। जिस पक्ष को जीत मिलेगी, उसी को भुगतान कर दिया जाएगा। इससे निर्माण कार्य में कोई बाधा नहीं उत्पन्न होगी।
हाईवे के साथ दोनों तरफ बनेंगे सर्विस रूट
गंगा एक्सप्रेस-वे 13 मीटर ऊंचा होने की वजह से इसके दोनों तरफ सर्विस रूट बनाए जाएंगे। यानि दोनों तरफ आम लोगों के लिए सड़कें बनेंगी। 130 मीटर की चौड़ाई के दायरे में ही सड़कें बनेंगी। लोगों को एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए जगह-जगह ब्रिज भी बनाए जाएंगे।
कुंडा और लालगंज के किसानों को मुआवजे का भुगतान करने के लिए 455 करोड़ रुपये मिले थेे। जिसमें से 415 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। तीस करोड़ रुपये अभी बचे हैं। मुआवजे की धनराशि खत्म होेने पर शासन से मांग की जाएगी। जिन किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया है, उनके खाते में मुआवजे की धनराशि भेजी जा रही है। - इंद्र बहादुर वर्मा, मुख्य राजस्व अधिकारी