प्रधान डाकघर में 1.10 करोड़ के गबन के मामले की जांच की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी है। करीब एक साल पहले सहायक पोस्ट मास्टर सहित छह कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई थी। आरोपी एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की थी, मगर अब तक पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इस मामले में कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है।
प्रधान डाकघर में वर्ष 2013 में लाखों रुपये के घालमेल की शिकायत हुई थी। एक खाताधारक ने आरोप लगाया था कि कुछ कर्मचारी खाताधारकों से रुपये लेने के बाद जमा नहीं कर रहे हैं। उनकी पासबुकों पर फर्जी तरीके से रुपये जमा होने की मुहर लगा दी जा रही है। मामले की जानकारी होने पर चीफ पीएमजी लखनऊ ने जांच के लिए टीम गठित कर दी। सालभर पहले पूरी हुई जांच में कुल 1,10,56,000 रुपये का गोलमाल सामने आया।
घपले में संलिप्तता पाए जाने पर सहायक पोस्टमास्टर समेत छह कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा जांच टीम के सदस्यों ने प्रधान डाकघर में पूर्व में कार्यरत रहे 33 और कर्मचारियों को नोटिस जारी किया था। इसके अलावा मुख्य आरोपी एजेंट के खिलाफ डाक विभाग ने धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया।
पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शुरू में आरोपी एजेंट के घर दबिश दी, मगर इसके बाद शांत बैठ गई। करीब एक साल से पुलिस जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। पुलिस एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। सीनियर पोस्ट मास्टर विकास मिश्रा ने बताया कि गबन के मामले में आरोपी एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस इसकी जांच कर रही है।
सैकड़ों ग्राहकों के खाते से गायब थी रकम
डाकघर की योजनाओं से जुड़े ग्राहक समय-समय पर अपनी किस्त जमा करते रहे। जब योजना की समयावधि पूरी हुई तो उन्होंने डाकघर से स्टेटमेंट निकलवाया। मगर उनके खाते में रुपये नहीं थे। आरोप है कि आरोपी एजेंट ने ग्राहकों से रुपये लेने के बाद जमा नहीं किया। पासबुक पर फर्जी तरीके से हस्ताक्षर कर काउंटर पर बैठे कर्मचारियों से मुहर लगवाकर ग्राहकों को दे देता था।