मेडिकल कॉलेज को छोड़कर जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों को खाना नहीं दिया जा रहा है। मरीजों के लिए तीमारदारों को खाना घर से मंगाना पड़ रहा है। भोजन की मांग करने वाले मरीजों को डिस्चार्ज कर जिम्मेदार बड़ा खेल कर रहे हैं।
शासन ने मेडिकल कॉलेज के साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती होने वाले मरीजों को सुबह नाश्ता, दोपहर व रात में भोजन देने का निर्देश दिया है। स्वास्थ्य विभाग के मुखिया ने इसके लिए अपने करीबी को टेंडर दे रखा है, मगर ठेकेदार माह में एक बार ही अस्पतालों मं आता है। वह एक रजिस्ट्रर में भर्ती मरीजों का ब्यौरा लिखवाने के साथ ही दोनों मीटिंग खाना, सुबह नाश्ता देने की लिखापढ़ी कर सीएमओ के पास बिल भेज देता है।
मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि उसी बिल का भुगतान कर दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है। जबकि शासन ने हर दिन खाने का अलग-अलग मेन्यू निर्धारित किया है। सरकार के आदेश को जिले में पालन होता नहीं दिख रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों का रवैया इतना लचर है कि कभी मरीजों को मिलने वाले भोजन के बारे में जानकारी नहीं ली जाती है। कोहड़ौर सीएचसी में भर्ती प्रसव पीड़िता ज्ञानीपुर निवासी निशा पत्नी आशीष ने बताया कि खाने की तो बात दूर नाश्ता तक नहीं दिया गया।
परिजनों को घर से खाना लेकर आना पड़ रहा है। इस बारे में सीएचसी अधीक्षक भरत पाठक का कहना है कि बीते दो माह से ठेकेदार नहीं आ रहा है। ऐसे में मरीजों को खाना नहीं मिल पा रहा है। इसकी शिकायत सीएमओ से की जा चुकी है। उधर, पट्टी सीएचसी अधीक्षक नीरज सिंह ने बताया कि जुलाई माह से ठेकेदार गायब चल रहा है। मरीजों को खाना तो दूर नाश्ता तक नहीं मिल पा रहा है। इसकी लिखापढ़ी की गई है। जैसे सीएमओ का आदेश मिलेगा, वैसे ही कार्य किया जाएगा। अन्य सीएचसी अधीक्षकों ने भी यही जवाब दिया।
खाना के साथ फल-अंडा देने का भी है निर्देश
शासन के मेन्यू के अनुसार सभी सीएचसी में भर्ती मरीजों को सुबह नाश्ता में एक फल अथवा अंडा, एक ग्लास दूध, दोपहर में दाल, रोटी, हरी सब्जी, सलाद व रात में भोजने परोसने का निर्देश है। भोजन परोसने वाली संस्था मरीजों को बरगलाकर उनका हिस्से का भोजन निगल रही है। सीएचसी में उच्च अधिकारियों के निरीक्षण की जानकारी पर संस्था के कर्मचारी आननफानन में मरीजों को भोजन व नाश्ता समय पर वितरित करने लगते है।
प्रति थाली नब्बे रुपये होता है भुगतान
सरकारी अस्पताल में शासन की ओर से भर्ती होने वाले मरीजों को प्रति थाली भोजन देने के लिए संस्था को नब्बे रुपये का भुगतान होता है। अलग- अलग अस्पतालों में मरीजों को भोजन परोसने वाली संस्था शासन के नियम को ठेंगा दिखाकर लाखों रुपये का बजट हर माह चट कर रही है। कभी संस्था के भोजन की जांच भी नहीं की जाती है।
खाना और नाश्ता न मिलने की शिकायत मेरे पास नहीं आई है। यदि शिकायत आई तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर सीपी शर्मा, एसीएमओ