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बारिश से खेतों में नमी बरकरार , पिछड़ रहीं आलू की बुवाई

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अक्टूबर माह में भी बारिश होने से आलू किसानों को तगड़ा झटका लगा है। खेत में पानी भरने से आलू की अगैती खेती पिछड़ गई है। इतना ही नहीं जिन किसानों ने बुआई कर ली थी अचानक बारिश होने से उन्हें नुकसान उठाना पड़ा है। खेतों में अभी भी नमी बरकरार है। कृषि जानकारों का कहना है कि बुआई में देरी होने पर आलू की उपज घटने और रोग लगने की आशंका बड़ गई है।
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जिले में हर साल करीब 87 हजार मीट्रिक टन आलू की पैदावार होती है। रानीगंज तहसील क्षेत्र के विकासखंड लक्ष्मणपुर, मानधाता, गौरा, शिवगढ़ के अलावा लालगंज व सदर तहसील क्षेत्र में आलू की बड़े पैमाने पर किसान की खेती करते हैं। वैसे आमतौर मंडियो में नई आलू जनवरी माह की शुरुआत में आ जाती है। लेकिन इस बार संभावना कम है। जिले में अधिकतर किसानों ने अगैती आलू की बुवाई की तैयारी 15 अक्तूबर से शुरू कर दी थी।
इसके अलावा कुछ किसान तैयार करने में जुटे हुए थे। मगर, अचानक मौसम बदल गया। बारिश शुरू हो गई। लगातार तीन दिनों तक मौसम खराब रहा। बारिश होने से अगैती आलू की फसल बर्बाद हो गई। खेतों में पानी जमा हो गया। इससे फसलें नष्ट हो गई। बारिश से आलू की खेती पर काफी असर पड़ा है। खेतों में कहीं पानी जमा है तो कहीं इतनी नमी है, कि खेत की जुताई नहीं की जा सकती है।
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इसे लेकर किसान परेशान हैं। कृषि जानकारों के अनुसार, बारिश से आलू की फसल लगभग पखवारे के लिए पिछड़ रहीं है। रोग लगने की आशंका बढ़ जाती है। जिला उद्यान अधिकारी सीमा सिंह राणा ने बताया कि बारिश से अगैती आलू की फसल प्रभावित हुई है। बारिश से खेतों में पानी जमा होने व नमी बनने से आलू की बुवाई में थोड़ा बिलंब हो रहा है।
आलू के दाम में रहेगा उछाल
बारिश से अगैती फसल इस बार प्रभावित हुई है। ऐसे में बाजार में अगैती आलू का स्टॉक कम आएगा। किसानों का कहना है कि बारिश की वजह से अगैती आलू की बुवाई नहीं हो पाई। जहां बुवाई हुई वहां, फसल बारिश से खराब हो गई है। जानकारों का मानना है कि इस बार भाव में आलू तेज रहने की संभावना है।
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