जिले में करोड़ों की लागत से मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो गया है। सोमवार को इसका लोकार्पण होने जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी जिले के मरीजों को बहुत लाभ नहीं मिलने जा रहा है। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय की दशा जस की तस है। वार्ड से लेकर ओपीडी में अभी किसी तरह का बदलाव नहीं हो सका है। हादसे में, गोली लगने से घायल गंभीर मरीजों का मेडिकल कॉलेज में अभी इलाज हो पाना संभव नहीं हे। ऐसे में मरीजों को प्रयागराज या फिर लखनऊ के चक्कर काटने पड़ेंगे।
मेडिकल कॉलेज का संचालन होने जा रहा है। यहां एमबीबीएस की सौ सीटों पर दाखिले होंगे। नए चिकित्सक भी आ गए हैं, मगर इसके बावजूद हेड इंजरी, गोली लगने से घायल और जले मरीजों के इलाज की व्यवस्था नहीं है। हादसे में घायल होने के बाद यदि हेड इंजरी, हाथ-पैर में फ्रैक्चर होने के बाद यदि ऑपरेशन की जरूरत पड़ी तो ऐसे मरीजों को प्रयागराज के चक्कर काटने पड़ेंगे। चिकित्सक हैं, ओटी भी है, मगर ऑपरेशन के दौरान प्रयोग में आने वाली सीआर मशीन की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
इसलिए चिकित्सक मरीजों को प्रयागराज रेफर कर देंगे। इतना ही नहीं, जिले में हर दिन गोली चलने की बात आम हो गई है। ऐसे मरीज मेडिकल कॉलेज आएंगे। मगर यहां एमआरआई और सीटी स्कैन की व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को ऑपरेशन करने के बजाय प्रयागराज रेफर करना डॉक्टरों की मजबूरी होगी। मेडिकल कॉलेज परिसर में प्लास्टिक सर्जरी एवं बर्न यूनिट सेंटर की स्थापना हुई थी।
सभी वार्डों में एसी में लगे थे, मगर ज्यादातर एसी गायब हो गए। आज तक सर्जरी यूनिट का संचालन नहीं हो सका। मौजूदा समय में यहां एचआईवी विभाग का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में जले, गोली लगने से घायल य पिर सड़क हादसे और मारपीट में गंभीर रूप से घायल मरीजों को प्रयागराज जाना होगा। मरीजों की परेशानी अभी बनी रहेगी।
जो उपकरण नहीं हैं, वे जल्द आ जाएंगे। चिकित्सक आ चुके हैं। इससे अब जिले के लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। पहले जैसे सभी मरीजों को प्रयागराज नहीं रेफर किया जाएगा। अति गंभीर रोगियों को ही प्रयागराज या फिर सीधे पीजीआई रेफर किया जाएगा। डॉक्टर आर्यदेश दीपक, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज