सोनपुर गांव में पुलिस के जवान सुरक्षा की दृष्टि से रात दिन पहरा दे रहे हैं। पीड़ित परिवार से मिलने सपा के प्रतिनिधि मंडल के सोनपुर गांव आने की खबर से जिले में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई और हिंदू संगठन भी एकजुट होकर सोनपुर गांव में बेगुनाह पीड़ित परिवार की मदद के लिए पहुंचने का मन बनाने लगे।
जेठवारा थाना क्षेत्र के सोनपुर गांव में मदरसा संचालक मौलाना फारूख की हत्या के हफ्ते भर बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई। पूरे गांव में आज भी दहशत का माहौल बरकरार है। कई घरों में अभी भी ताले लटक रहे हैं। पुलिस के तमाम प्रयास के बाद भी कई ब्राह्मण परिवार सदमे में हैं और वह घर वापस आने के लिए तैयार नहीं हैं।
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पूरे गांव में पुलिस के जवान सुरक्षा की दृष्टि से रात दिन पहरा दे रहे हैं। पीड़ित परिवार से मिलने सपा के प्रतिनिधि मंडल के सोनपुर गांव आने की खबर से जिले में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई और हिंदू संगठन भी एकजुट होकर सोनपुर गांव में बेगुनाह पीड़ित परिवार की मदद के लिए पहुंचने का मन बनाने लगे। हालांकि प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल प्रभाव से किसी भी राजनीतिक गतिविधि पर रोक लगा दी और ऐहतियात के तौर पर कई थानों की फोर्स को मौके पर तैनात कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद लोगों के चेहरों पर दहशत साफ देखी जा रही है।
मौलाना फारूख की हत्या में नामजद आरोपी सलाखों के पीछे जा चुके हैं, लेकिन घटना के वक्त मौके पर जुटी भीड़ ने आरोपी के साथ-साथ गांव के निर्दोष हिंदूओं के घरों में घुसकर तोड़फोड़ की, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रतिशोध की इस घटना में गांव के दिनेश चंद्र पांडेय, जयप्रकाश पांडेय, राजेश चंद्र पांडेय, अनिल कुमार पांडेय, रमाकांत पांडेय, लाला पांडेय आदि करीब सात हिंदू ब्राह्मण परिवार आज भी रिश्तेदारों के यहां शरणार्थी बने हैं और अपने घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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मौलाना हत्याकांड में बेगुनाहों में पिस रहे आशीष कुमार पांडेय ने बताया कि गांव के ब्राह्मण परिवार वर्षों से बहुसंख्यक मुसलमानों के निशाने पर हैं। पिछले प्रधानी चुनाव के समय वर्तमान प्रधान व महरूम मौलाना के भांजे सलमान का समर्थन न करने पर वह लोग मौके की तलाश में थे। मौलाना की हत्या की आड़ में ब्राह्मण परिवारों से बदला लेने की साजिश के तहत पूरे ब्राम्हण परिवार को परेशान करके पलायन करने पर मजबूर कर दिया है।