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जयंती पर याद किए गए आजादी के महानायक चंद्रशेखर आजाद

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शहीद चंद्रशेखर आजाद जयंती पर श्रीराम तिराहा स्थित उनकी प्रतिमा पर मार्ल्यापण करते युवा क्रांति - फोटो : PRATAPGARH
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भारत की आजादी के महानायक चंद्रशेखर आजाद की जयंती गुरुवार को जिलेभर में विभिन्न संगठनों द्वारा मनाई गई। जगह-जगह सोशल डिस्टेंसिंग के बीच कार्यक्रम हुए। इस दौरान वक्ताओं ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके पराक्रम पर प्रकाश डाला। उन्हें सच्चा देशभक्त बताया।
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शहर के दहिलामऊ स्थित अटल भवन में भाजयुमो काशी क्षेत्र के महामंत्री वरुण प्रताप सिंह के संयोजकत्व में चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर संगोष्ठी का आयेाजन हुआ।
इस दौरान उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद सच्चे देशभक्त थे। अपने पराक्रम के बल पर उन्होंने अंग्रेजों को कई बार पटखनी दी। प्रतापगढ़ जिले में भी चंद्रशेखर आजाद ने अपना ठिकाना बनाया था। मतुई नमकशायर गांव में आज भी इसके प्रमाण मिलते हैं।
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उन्होंने कहा कि हम सभी को उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। भाजयुमो जिलाध्यक्ष रवि गुप्ता के नेतृत्व में देशभक्त चंद्रशेखर आजाद का की जयंती मनाई गई। उन्होंने अपने आवास पर कदंब का पौध लगाया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को चंद्रशेखर आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों का जीवन दर्शन पढना चाहिए। आजादी की लड़ाई में उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता है।
इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष अरुण मौर्या, आनन्द सिंह, लवकुश वैश्य, मंगलम यादव, संदीप मिश्रा, आदि मौजूद रहे। इधर ब्रम्हदेव साहित्य समाज द्वारा पूरे ईश्वरनाथ गांव में चंद्रशेखर आजाद की जयंती मनाई गई। इस दौरान आजादी की लड़ाई में उनके पराक्रम पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर धीरेंद्र शुक्ल, राजेश्वर, प्रीतम, दुर्गेश, कल्लू, रवि शुकर, बृजेंद्र, राजेश आदि मौजूद रहे।
हरियाली तीज पर महिलाओं ने की पति की लंबी उम्र की कामना
हरियाली तीज पर महिलाओं ने भगवान शिव, मां पार्वती व कार्तिकेयजी का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। कजरी गीत का भी गायन किया। इस दौरान महिलाओं ने पति की लंबी उम्र की मंगलकामना की।
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को हरियाली तीज मनाई जाती है। महिलाएं यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। भगवान शिव, मां गौरा व भगवान कार्तिकेय का विधि-विधान से पूजन-अर्चन करती हैं। गुरुवार को सुबह से ही महिलाएं पूजन की तैयारी में जुट गईं। सुबह स्नान करने के बाद महिलाओं ने सोलह श्रृंगार किया। धतूर, मदार, बेलपत्र, रोली, चंदन, फल आदि से पूजन की थाल सजाई। घर में ही भगवान शिव, मां गौरा व कार्तिकेय की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान भक्तिगीत भी गाए।
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