प्रतापगढ़ में गठित होगा विकास प्राधिकरण
कटरामेदनीगंज और सिटी नगर पंचायत समेत 68 राजस्व गांवों को किया गया शामिल
विनियमित क्षेत्र ने तैयार किया प्रस्ताव, डीएम की संस्तुति के बाद भेजा जाएगा शासन को
संवाद न्यूज एजेंसी
प्रतापगढ़। शहर का दायरा बढ़ने व नगर पालिका और दो नगर पंचायतों के किनारे से बाईपास गुजरने के बाद अब नए सिरे से विकास प्राधिकरण के गठन की कवायद तेज हो गई है। शहर के आसपास के 68 राजस्व गांव भी प्राधिकरण का हिस्सा होंगे। इसके लिए विनियमित क्षेत्र ने प्रस्ताव तैयार किया है। जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद पत्रावली शासन को भेजी जाएगी।
नगर पालिका के सीमा विस्तार के बाद अब फिर से प्रतापगढ़ में विकास प्राधिकरण के गठन की कवायद तेज हो चली है। ए श्रेणी की बेल्हा नगर पालिका परिषद, सिटी व कटरामेदनीगंज नगर पंचायत क्षेत्र को विकास प्राधिकरण में शामिल किया गया है। नगर पालिका व दोनों नगर पंचायतों से सटे छोटे और बड़े 68 राजस्व गांवों को भी विस्तार में लिया जा सकता है। प्रशासन ने जिले के इतिहास, पिछड़ापन व भविष्य में विकास की बेहतर संभावनाओं को देखते हुए प्राधिकरण के गठन को बेहद जरूरी बताया है। प्राधिकरण का प्रस्तावित क्षेत्र लखनऊ-वाराणसी व प्रयागराज-अयोध्या राजमार्ग से सटा होना भी दर्शाया गया है। खास बात यह है कि नगर पालिका परिषद से चार किमी की दूरी पर नगर पंचायत सिटी व कटरामेदनीगंज हैं। नगर पालिका और इन दोनों नगर पंचायतों से बाईपास भी गुजर रहा है। नगर पालिका व दोनों नगर पंचायतों से होकर राजमार्ग भी गुजरे हैं। जिस वजह से विकास प्राधिकरण के गठन की जरूरतों को देखते ह़ुए शासन ने रिपोर्ट तलब की थी। इसके लिए विनियमित क्षेत्र ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे 29 सितंबर को जिलाधिकारी के साथ होने वाली बैठक में रखा जाएगा। डीएम की संस्तुति मिलने के बाद पत्रावली शासन को भेज दी जाएगी।
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प्राधिकरण का गठन होने से भूमाफियों की टूटेगी कमर
विकास प्राधिकरण के गठन के पीछे सबसे बड़ी वजह भूमाफियाओं पर शिकंजा कसना है। शासन को भेजे जा रहे प्रस्ताव में इसका भी जिक्र किया गया है। संबंधित अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नगरपालिका व दोनों नगर पंचायत क्षेत्र में भूमाफिया बड़े पैमाने पर सक्रिय हैं। गलत तरीके से जमीन की खरीद-फरोख्त की जा रही है। अब तक कई कॉलोनियों का निर्माण भी किया जा चुका है। प्राधिकरण के गठन से भूमाफियों पर शिकंजा कसेगा। साथ ही जमीन की सही देखरेख भी की जा सकेगी। नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मिलने लगेंगी।
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पानी की समस्या होगी दूर
प्राधिकरण गठन के पीछे जन सुविधाओं को प्रमुखता से रखा गया है। बताया गया कि सभी क्षेत्र में पेयजल, पार्किंग, बिजली, जलनिकासी, आवागमन, सीवर लाइन का अभाव है। भविष्य में गंभीर जलसंकट का भी अंदेशा है। प्राधिकरण की देखरेख में जन सुविधाओं में इजाफा होगा। इसके अलावा सरकारी योजनाओं का लाभ नागरिकों तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।
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विकास प्राधिकरण में शामिल हो सकते हैं ये गांव
विकास प्राधिकरण में सदर तहसील के टेकार, लोहंगपुर, पूरेवंशी, घोराहा, पूरेबहोरिया, सेतापुर, कोलपुर, रामगढ़ी, सरायवीरभद्र, चौखड़ पूरेअंती, पूरेमाधव सिंह, कादीपुर, खजुरनी, पूरे मोहन, महुआर, किशुनदासपुर, गड़ई चकदेइया, सरायकल्यान देव, ईसीपुर, मझिलहा, पूरेसुखई, भुवालपुर डोमीपुर, विक्रमपुर, भदोही, जलालपुर, बबुरहा, राजगढ़, नौबस्ता, परमनाथपुर, पतुलकी, बरिया समुद्र, भानापुर, आदमपुर, जगदीशपुर, कुटिलिया समेत 58 गांव शामिल हैं। वहीं पट्टी तहसील के पूरे कोलाहल, सूर्यगढ़ जगन्नाथ, संग्रामपुर, कमास, नरहरपुर, पूरेचिरंजीव, परमेश्वर पट्टी, पूरेदयाल, पूरेकुमार, बैजलपुर को प्राधिकर में शामिल करने की संस्तुति की गई है।
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विकास प्राधिकरण के लिए मानक पूरा कर प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द ही जिलाधिकारी की समीक्षा के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
मोहनलाल गुप्ता, एसडीएम सदर/प्रभारी अधिकारी, विनियमित क्षेत्र
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