अब बरसात के दिनों में बकुलाही नदी न तो उफना कर बहेगी और न ही गर्मी के दिनों में सूखी नजर आएगी। बकुलाही नदी में वर्षों से जमी सिल्ट को साफ करने के लिए जिला प्रशासन की मुहिम कारगर साबित हुई है। शासन ने 4.52 करोड़ रुपये का बजट जारी कर नदी को साफ कराने को कहा है। ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब बकलाही नदी को साफ करने के शासन ने भारी भरकम बजट मुहैया कराया है।
जिले में 87 किमी लंबी बकुलाही नदी बरसात के दिनों में उफनाकर बहती है, मगर गर्मी के दिनों में अधिकांश हिस्से सूख जाते हैं। रायबरेली जिले के भरतपुर झील से निकलने वाली बकुलाही नदी कुंडा में बेंती झील, मांझी झील और कालाकांकर झील से जल ग्रहण करते हुए बड़ी नदी का स्वरूप ग्रहण करती है। जिले के कालाकांकर, कुंडा, बाबागंज, बिहार, मानधाता और सदर ब्लाक को जोड़ते हुए सई नदी में गिरती है। नदी के पानी से अधिकांश किसान अपने फसलों की सिंचाई करते हैं।
मगर गर्मी के दिनों में जब पानी की आवश्यकता होती है, तो नदी में पानी ही नहीं रहता है। शासन ने वर्षों बाद बकुलाही नदी में जमी सिल्ट की सफाई कराने का निर्णय लिया है। सिंचाई विभाग की मांग पर शासन ने 4.52 करोड़ रुपये का बजट जारी करके साफ कराने को कहा है। बकुलाही नदी के साफ होने से बरसात के दिनों में जहां आसपास के गांवों में पानी जमा होने की आशंका समाप्त हो जाएगी, वहीं सभी किसानों का आसानी से पानी मिलेगा।
मानधाता, बाबागंज और बिहार के कुछ हिस्सों के लिए यह नदी जीवनदायिनी है। सिंचाई विभाग के अफसरों ने कई बार बकुलाही नदी पर प्लान तैयार किया, मगर शासन से बजट नहीं मिलने के कारण सारी तैयारी बेकार हो जाती थी। अब इस वर्ष साढ़े चार करोड़ रुपये मिलने से सिल्ट सफाई की तैयारी में अफसर जुटे हुए हैं।
बकुलादी नदी पर जंगली पौधे की कटाई करने के साथ ही सिल्ट की सफाई कराने के लिए 4.52 करोड़ रुपये मिले हैं। टेंडर हो गया है, बरसात का दौर समाप्त होते ही सफाई कार्य प्रारंभ किया जाएगा। किसानों के लिए पानी की उपयोगिता बनाए रखने के लिए और विकल्पों की तलाश हो रही है।
- राजेश कुमार, अधिशाषी अभियंता, सिंचाई विभाग खंड दो