जबकि कागज पर लगातार गोल्डन कार्ड बनाने के लिए अभियान चलाए जाने की बात स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसर करते हैं। शासन के सर्वे के बाद आई रिपोर्ट में पता चला है कि जिले के 53 प्रतिशत पात्र परिवार ऐसे भी हैं, जिनमें आज तक एक भी गोल्डन कार्ड नहीं बने हैं।
लाभ नहीं मिलने पर कार्ड बनवाने से कतरा रहे लोग
जिले के तमाम लोगों ने आयुष्मान योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाया। उनका कहना है कि इलाज की सुविधा महज सरकारी अस्पतालों तक सीमित है। नर्सिंगहोम संचालक इलाज के नाम पर रुपये मांगते हैं। बहुत से नर्सिंगहोम संचालक ऐसे हैं जो कार्ड दिखाते ही मरीज की हालत गंभीर बताकर प्रयागराज रेफर कर देते हैं। ऐसे में जिन लोगों का कार्ड बन भी गया है, वे अब परिवार के सदस्यों का कार्ड नहीं बनवा रहे हैं।
सभी आरोग्य मित्रों के साथ जनसेवा केंद्र संचालकों को लगाकर छूटे हुए परिवारों का आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाया जाएगा। जिन परिवारों में किसी भी सदस्यों का अब तक गोल्डन कार्ड नहीं बना है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।