एक माह से मांगों को लेकर अड़े राइस मिलर्स अफसरों से वार्ता के बाद मान गए है। शनिवार को क्रय केंद्रों से राइस मिलर्स ने धान की उठान शुरू कर दी है। विभागीय अफसरों के अनुसार अब तक 7500 एमटी धान की खरीद हुई है, जिसके सापेक्ष पहले दिन ढाई हजार क्विंटल धान का उठान हुआ है। राइस मिलर्स के धान उठान शुरू करने से माना जा रहा है कि अब खरीद में तेजी आएगी।
जिले में धान खरीद के लिए कुल 52 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 18 खाद्य विभाग व 34 पीसीएफ के हैं। एक नवंबर से जिले भर में समर्थन मूल्य पर धान खरीद की जा रही है। धान विक्रय में किसानों की सहूलियत के लिए विभाग ने टोकन सहित कुछ नियम समाप्त कर दिए। ताकि किसानों को धान बेचने के लिए परेशान न होना पड़े। मगर इसके बाद भी किसानों को परेशान होना पड़े। दरअसल, धान की छंटाई में चावल के प्रतिशत कम करने की मांग को लेकर राइस मिलर्स अड़े हुए थे।
करीब एक माह से राइस मिलर्स धान का उठान नहीं कर रहे थे। इससे क्रय केंद्रों पर धान डंप हो गया था। धान डंप होने की वहज से क्रय केंद्रों पर खरीद नहीं हो पा रही थी। अधिकांश क्रय केंद्र ऐसे थे जहां खरीद ठप थी। भुपियामऊ बाजार के निकट कुसुमी के समीप साधन सहकारी समिति में धान रखने तक की जगह नहीं थी। धान की बोरियों के दबाव सेे दीवार धाराशायी हो गई। इससे दो दिन तक खरीद नहीं हो पाई।
इसके अलावा रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुंडा क्षेत्र में भी धान की खरीद के बाद उठान न होने से किसान परेशान थे। हालांकि अब किसानों को धान की खरीद में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। लंबे समय से मांगों को लेकर आंदोलित मिलर्स अब विभागीय अफसरों से वार्ता के बाद मान गए हैं। मिलर्स ने धान की उठान शुरू कर दी है। शनिवार को जिले में ढाई हजार क्विंटल धान की उठान हुई है। शनिवार को 500 क्विंटल धान की खरीद हुई। हालांकि अफसरों का कहना है कि रविवार से धान की खरीद और उठान दोनों में तेजी आएगी।
जिले में 72 हजार एमटी है धान की खरीद का लक्ष्य
जिले में कुल 72 हजार एमटी धान की खरीद का लक्ष्य है। टोकन सिस्टम भी खत्म हो गया है। मिलर्स से अटैचमेंट न होने की वजह से धान की खरीद में तेजी नहीं आ रही थी। एक महीने में सिर्फ 7500 एमटी ही धान की खरीद हो सकी है। हालांकि फरवरी तक धान की खरीद की जाएगी।
मिलर्स से अटैचमेंट हो चुका है। क्रयकेंद्रों से धान का उठान शुरू हो गया है। अब धान की खरीद में तेजी आएगी। किसानों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
अजीत तिवारी, डिप्टी आरएमओ