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सई नदी के तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर मांगा आशीष

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डाला छठ के मौके पर बेल्हा देवी धाम सई नदी में अस्ताचल सूर्य की उपासना करते लोग। संवाद - फोटो : PRATAPGARH
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डाला छठ पर बुधवार की शाम सई नदी के किनारे बेल्हा देवी तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। पुत्र की सलामती और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर आंचल फैलाकर आशीष मांगा। सई नदी के जल में खड़े होकर डूबते सूर्यदेव और छठ मइया को अर्घ्य दिया। नदी में उतरीं व्रती महिलाओं ने सूप में फल-फूल, मिठाई, नारियल, ठेकुवा, पोहा, गन्ने का प्रसाद चढ़ाया। मनोकामना पूरी होने पर कोशी भरने की परंपरा निभाई गई। नदी के किनारे गन्ने से बनाए गए मंडप आकर्षण का केंद्र बने रहे। घाट पर देवी जागरण की धूम रही।
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बिहार प्रांत का मुख्य पर्व डाला छठ अब जिले के प्रमुख त्योहारों में शामिल हो गया है। वैसे तो डाला छठ की शुरुआत तीन दिन पहले नहाय-खाय के साथ प्रारंभ हो गई थी। मंगलवार को खरना के साथ निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने छठ पूजा की विधिवत शुरुआत की। बुधवार को बेल्हा देवी मंदिर के किनारे सई नदी के घाट पर छठ मइया की पूजा धूमधाम से गाजे-बाजे और आतिशबाजी के साथ हुई। दिन भर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं गाजे-बाजे के साथ मंदिर में पहुंचीं।
सई नदी की बालू से कलश की स्थापना की गई। सूप में सारा सामान सजाकर सूर्य के डूबने का इंतजार किया जाता रहा। सूर्य में लालिमा पड़ने लगी तो महिलाएं और पुरुष सूप हाथ में लेकर सई नदी में उतरने के बाद पश्चिम की तरफ मुंह कर खड़े हो गए।
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महिलाएं सूप लेकर पानी में परिक्रमा करने लगीं। पांच बार सूर्य की परिक्रमा कर बेटों और घरवालों से सूप पर अर्घ्य दिलवाया। महिलाओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर आरती उतारी। घाट की पूजा संपन्न करने के बाद घर पहुंचकर कोशी भरने की पूजा हुई। बृहस्पतिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन किया जाएगा।
सैकड़ों महिलाओं ने भरी कोशी
मनौती पूरी होने से प्रसन्न व्रती महिलाओं ने हंसी-खुशी मिट्टी से बनी कोशी भरकर छठ मइया को प्रसन्न किया। आज ही के दिन मनौती पूरी होने के बाद कोशी भरने की परंपरा निभाई गई। इसी तरह से मनौती पूरी होने पर महिलाएं मंदिर के प्रवेश द्वार से लेटकर घाट तक पहुंचीं।
केले और गन्ने का महत्व
मंडप में सजे केले और गन्ने का विशेष महत्व होता है। बिहार निवासी पंडित रामनरेश पांडे ने बताया कि भगवान विष्णु की पूजा में केले के पत्ते का विशेष महत्व होता है। एकादशी में भगवान विष्णु शयन से उठते हैं। उगते और डूबते सूर्य की किरणों में भी उनका अंश माना जाता है। गन्ने को नई फसल के रूप में चढ़ाया जाता है। इसके पीछे अच्छी फसलों के पैदावार का तर्क बताया। इसलिए केले और गन्ने का महत्व है।
सेल्फी लेने की लगी रही होड़
पूजा के समय सई नदी के तट पर सेल्फी लेने वालों की भारी भीड़ रही। पत्नी और बच्चों के संग लोग मोबाइल से सेल्फी लेते नजर आए। इसके लिए लोग नदी में भी कूदने से बाज नहीं आए। सज-धजकर पहुंचीं महिलाएं भी सेल्फी लेने में पीछे नहीं रहीं। कभी वह बच्चों से फोटो खींचने को कहतीं तो कभी परिवार संग सेल्फी लेती रहीं।

डाला छठ पर बेल्हा देवी धाम सई नदी घाट पर सूर्य उपासना करती श्रद्धालु। संवाद- फोटो : PRATAPGARH

डाला छठ पर बेल्हा देवी धाम में पूजा के दौरान सिंदूर लगाती श्रद्धालु। संवाद- फोटो : PRATAPGARH

बुधवार को बेल्हा देवी धाम सई घाट पर डाला छठ के मौके पर पूजा करती महिलाएं। संवाद- फोटो : PRATAPGARH

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