लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले जिले के थानों में व्यापक फेरबदल शुरू हो गया। माननीयों ने मंगलवार को आनन-फानन अपने मोहरे सेट करा लिए। एसएसपी ने सात थानेदार समेत 10 दरोगाओं के तबादले किए।
कानून व्यवस्था में नाकारा माने जाने वाले दरोगा विधायकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं। कइयों को उन्होंने कुछ दिन पहले ही तैनात करा लिया था। एसएसपी ने कोतवाली के इंस्पेक्टर एनके भटनागर को क्राइम ब्रांच, रिट सेल प्रभारी सुभाष तोमर को कोतवाली थाने का इंस्पेक्टर बनाया। क्राइम ब्रांच से एसएन सिंह को बिलारी भेजा, लेकिन शाम को उन्हें वापस बुला लिया। बिलारी के एसओ चंद्रपाल यादव का भी तबादला निरस्त कर दिया गया।
कानून की एबीसीडी भी नहीं जानते कुछ?
भगतपुर से दुर्गेश मिश्रा को मूंढापांडे थाने का एसओ, पुलिस लाइन से शहरोज अनवर को भगतपुर एसओ, अरविंद मोहन शर्मा को कांठ से मझोला थाने की कमान दी गई। शिशुपाल शर्मा को मझोला से नागफनी एसओ, ओमकार सिंह को क्राइम ब्रांच से कांठ का एसओ बनाया गया।
नागफनी से नीरज को चुनाव कार्यालय भेजा। जबकि राधेश्याम को मूंढापांडे एसओ से बिलारी का एसएसआई बनाया गया। एसएसपी आशुतोष कुमार ने बताया कि कानून व्यवस्था की दृष्टि से तबादले किए गए हैं। जनहित में इनकी जरूरत थी। जबकि जानकारों की मानें तो कई थानेदार कानून व्यवस्था का ककहरा भी नहीं जानते।
मंगलवार सुबह जारी हुई सूची के अनुसार बिलारी थाने से चंद्रपाल यादव को हटाकर उनके स्थान पर क्राइम ब्रांच से एसएन सिंह को भेजा गया था। लेकिन इसके बाद चंद्रपाल को वापस बुलाने के लिए विधायक ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया। सूत्रों की मानें तो कप्तान को सुबह से शाम तक कई फोन करवाए। आखिर में चंद्रपाल यादव को बिलारी थाने की कमान दोबारा दे दी गई।
गौरतलब है कि इससे पहले एक विधायक ने कुंदरकी के एसओ पंकज यादव को वापस बुलाने के लिए कप्तान के बंगले पर बाकायदा धरना दे दिया था। उनका तर्क था कि चुनाव में वही दरोगा उन्हें फायदा पहुंचाएंगे।
चार थानों के पोलिंग बूथों से कोई नाम नहीं
मिलीभगत करके माननीयों ने लोकसभा चुनाव में मुश्किलें खड़ी करने वाले संभावित लोगों की सूची को भी बदलवा दिया। कांठ, कोतवाली, भोजपुर, गलशहीद, मैनाठेर थाना क्षेत्रों से जो सूचना आई, उसे देखकर अफसर भी दंग हैं। इन थानेदारों ने अपने यहां के किसी भी पोलिंग बूथ पर मतदान को प्रभावित कर सकने वाले लोगों के होने की जानकारी नहीं भेजी।
हिस्ट्रीशीटरों का नाम दबा गई पुलिस
अपने क्षेत्र से किसी भी व्यक्ति का नाम न भेजने वाले थानेदार हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को भी बचा गए। चुनाव में अब उनके खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं होगी। बता दें कि गलशहीद, कोतवाली, हजरतनगर गढ़ी आदि थाना क्षेत्रों में हिस्ट्रीशीटरों की काफी संख्या है। थाने और चौकी के बोर्डों पर उनके नाम भी लिखे हैं। लेकिन आगामी चुनाव में थानेदार उन्हें भी खतरा नहीं मान रहे।