पीलीभीत। किसानों की समस्याओं को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक उठाने वाले किसान नेता सरदार वीएम सिंह ने एक बार फिर कहा कि एमएसपी पर कानून बनाया जाए। ताकि धान की फसल आने पर किसानों को लुटने से बचाया जा सके। उनका कहना था कि अगर सरकार संजीदा हो तो किसानों के मुद्दों पर बार-बार कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा।
वीएम सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में धान की सरकारी खरीद के मामले में हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश पर शासनादेश टिके हुए थे। अब देखना यह है कि वे शासनादेश प्रभावी रहते हैं या नहीं। फिलहाल उन्हें धान ख़रीद पर संदेह है। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि धान की सरकारी खरीद एमएसपी पर सुनिश्चित कराने के लिए कानून बनाए।
वीएम सिंह का कहना था कि भारत कृषि प्रधान देश है। सरकार भी किसानों की आमदनी दोगुनी कराने के दावे कर रही है फिर किसानों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं होता। क्यों किसानों को अपने हक के लिए हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट गुहार लगानी पड़ती है। अगर सरकार सुन लेती तो किसानों की ओर से वह कोर्ट ही क्यों जाते। कोर्ट में समय लगता है। किसान के सवाल पर सरकार जवाब दाखिल करने में देरी करती है। इसके बाद सुनवाई होती है और फैसले आते-आते किसान का काफी नुकसान हो जाता है। ऐसे हालात में किसानों के प्रति सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए।
याचिका खारिज होने से सरकार की मनमानी हावी होने का अंदेशा
वीएम सिंह ने बताया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 अगस्त को उनकी एक पुरानी याचिका ‘वीएम सिंह बनाम केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार’ को खारिज कर दिया है। इसके बाद अब धान की सरकारी खरीद केवल सरकार के आदेशों और निर्देशों पर ही निर्भर रह गई है। ऐसे में धान खरीद पर सवालिया निशान लग रहा है।