पीलीभीत। वसुंधरा कॉलोनी निवासी अंशुल गुप्ता खारकीव से 12 किलोमीटर दूर पिसौचिन में फंसे हुए हैं। अंशुल ने बुधवार रात खारकीव से पिसौचिन तक के खतरे भरे पैदल सफर का बयान किया। अंशुल बुधवार शाम साढ़े पांच बजे खारकीव के लिए चले थे और साढ़े दस बजे पिसौचिन पहुंचे। रास्ते में एक मौका ऐसा भी आया जब आंखों के सामने इमारत पर मिसाइल गिरी। बिल्डिंग के शीशे टूटकर इनके ऊपर गिरे। जान का खतरा सामने देखकर सब डर गए। लेकिन गनीमत रही कि दूसरा धमाका नहीं हुआ और जान बच गई।
अंशुल के बड़े भाई अर्पित गुप्ता ने बताया कि भारत सरकार अंशुल और उनके साथियों को एअर लिफ्ट कराए तो जान तो बच जाए। अर्पित के मुताबिक बुधवार को तहसीलदार और गुरुवार को नायब तहसीलदार ने परिवार से संपर्क किया है। पूरा विवरण नोट किया है लेकिन अभी तक ऐसा कोई भरोसा नहीं मिला जिससे यह पता लग सके कि अंशुल कैसे और कब वापस आएगा।
अशोक कॉलोनी के मूल निवासी सत्यम अग्रवाल दस घंटे पैदल चले और यूक्रेन से जैसे-तैसे रोमानिया बॉर्डर पहुंच चुके हैं। रास्ते में खींचतान और धक्का मुक्की में उनके कपड़े फट गए। सुकून तब मिला जब बॉर्डर पार करके रोमानिया पहुंचे। रोमानिया में भोजन और ठहरने का बेहतर इंतजाम रोमानिया के लोगों ने किया है। नए कपड़े भी दिए।
अब वह यूक्रेन बॉर्डर पार करके रोमानिया के तंबू में शरण लिए हैं। स्वदेश वापसी के लिए फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। सत्यम ने बताया कि रोमानिया में मरीन जार्ज लुलियन ने भारतीयों के लिए शाकाहारी भोजन का इंतजाम कराया है।