नहीं मिली बाइक, कैसे जंगल तक पहुंचा तारा
परिजनों के मुताबिक तारा सिंह बाइक से ही गांव की ओर रवाना हुआ था। लेकिन, जहां उनका शव मिला, उसके आसपास उनकी बाइक नहीं मिली। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में बाइक की तलाश भी की लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसी आधार पर वन विभाग के अफसरों ने संदेह जताते हुए इसे बाघ के हमले में मौत होने से इनकार किया।
शॉर्टकट के चक्कर में गई जान
तारा सिंह ने समय और ईंधन बचाने के लिए शार्टकट रास्ता चुना। वही निर्णय जानलेवा साबित हुआ। उसके गांव के लोग न्यूरिया आने जाने के लिए अक्सर भरतपुर जंगल के कच्चे रास्ते का ही इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि इस रास्ते से वे पांच किलोमीटर की दूरी तय करके न्यूरिया पहुंच जाते हैं। वहीं पक्की सड़क से उन्हें 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।
प्रभागीय वनाधिकारी टाइगर रिजर्व के नवीन खंडेलवाल ने बताया कि मामला संदिग्ध है और बाघ के हमले से मौत होने की पुष्टि नहीं की जा सकती है। फिलहाल मौके पर चार कैमरों को लगा दिया गया है। टीम को भी निगरानी के लिए लगाया गया है।