पीलभीत से मैलानी रेल खंड पर पत्थरों की ऊपर उगी घास। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। मैलानी रेल खंड पर तीन साल पहले आमान परिवर्तन का काम शुरू हुआ था। इसके बाद पीलीभीत से शाहगढ़ के बीच जंगल क्षेत्र में अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न मिलने से कार्यदायी संस्था ने 19 किलोमीटर को छोड़कर बाकी क्षेत्र में काम शुरू कर दिया। बाद में जंगल और रेलवे के अफसरों की संयुक्त सर्वे के बाद शर्तों के साथ जंगल क्षेत्र में काम करने के लिए मार्च में एनओसी दे दी गई, मगर अब कार्यदायी संस्था मैलानी और शाहगढ़ के बीच ट्रेन चलाने की तैयारी में जुटी है। इसी वजह से पीलीभीत-शाहगढ़ के 19 किलोमीटर में अभी तक पांच फीसदी भी काम नहीं हो पाया है।
लखनऊ रूट के मैलानी रेल खंड पर आमान परिवर्तन के लिए 30 मई 2018 को मेगा ब्लॉक लिया गया था। इससे इस रेल खंड पर चलने वाली मीटरगेज की ट्रेनों को हमेशा के लिए बंद कर दिया था। 62 किलोमीटर लंबे इस रेल खंड पर आमान का काम शुरू करने के लिए टाइगर रिजर्व से जंगल क्षेत्र में काम करने के लिए एनओसी को आवेदन किया गया। काफी जद्दोजहद के बाद मार्च में काम करने के लिए जंगल की ओर से कार्यदायी संस्था को एनओसी मिल गई, मगर काम अभी तक शुरू नहीं हो सका।
सूत्रों ने बताया कि 62 किलोमीटर लंबे इस रूट पर कार्यदायी संस्था ने एनओसी न मिलने से 43 किलोमीटर मैलानी शाहगढ़ के बीच काम शुरू कर दिया था। जो काम इस समय अंतिम पड़ाव में है। कार्यदायी संस्था शाहगढ़ और मैलानी के बीच में काम पूरा करने के बाद इस पीलीभीत-शाहगढ़ के 19 किलोमीटर लंबे एरिया में काम शुरू करेगी।
इस काम की अभी नहीं हो सकी शुरुआत
शाहगढ़ और पीलीभीत के बीच दो मेजर पुल, पांच माइनर पुलिया और पांच क्रॉसिंग पर अभी काम शुरू नहीं हुआ है। इनमें एक संडा का पुल, दूसरा कटना नदी का पुल निर्माण में लंबा समय लग सकता है। जबकि किलोमीटर 242 से 247 के बीच अभी तक मीटरगेज की पटरिया तक नहीं उखड़ सकी हैं। ऐसे में इस क्षेत्र का काम कब तक पूरा होगा। किसी को नहीं पता।
मैलानी शाहगढ़ के बीच अमान परिवर्तन का काम पूरा हो चुका है। जल्द ही सीआरएस निरीक्षण होने की संभावना है। इसके बाद पीलीभीत-शाहगढ़ के बीच काम शुरू कर दिया जाएगा। बारिश के दौरान भी काम जारी रहेगा।
- संजय सिंह, असिस्टेंट मैनेजर, आरवीएनएल कार्यदायी संस्था