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तीसरी लहर की आशंका के बीच निपटने के इंतजामों की रफ्तार बेदह धीमी

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जिला अस्पताल में तैयार किया गया ऑक्सीजन प्लांट का फाउडेंशन। - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच इससे बचाव के लिए की जा रही तैयारियों की चाल काफी सुस्त है। अब तक माधोटांडा सीएचसी पर लगे ऑक्सीजन प्लांट की ही शुरुआत हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के लिए बाल रोग विशेषज्ञ के अलावा स्टाफ व अन्य संसाधन जुटाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बाल रोग विशेषज्ञों का भी अभाव है, हालांकि महकमे का दावा है कि आउटसोर्स के जरिये स्टाफ जुटा लेंगे।
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जिले की आबादी लगभग 24.5 लाख से अधिक है। इसमें शून्य से 10 साल तक के बच्चों की संख्या 6.40 लाख है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका जता रहे हैं। आशंका है कि इससे सबसे अधिक बच्चे प्रभावित होंगे। इसके मद्देनजर शासन-प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने में जुटे हैं। जिला महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में चल रहे कोविड अस्पताल की चौथे मंजिल पर 40 बेड का पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) तैयार किया जा रहा है। तीसरी मंजिल पर कोविड पीडियाट्रिक वार्ड विद पाइप लाइन बनाने का निर्णय लिया।
माधोटांडा, बरखेड़ा, जहानाबाद और न्यूरिया में 30-30 बेड का कोविड केयर वार्ड और प्रत्येक सीएचसी पीएचसी पर 10-10 बेड रिजर्व करने के लिए मई की शुरुआत में कहा गया था, लेकिन धरातल पर यहां काम की रफ्तार बेहद सुस्त है। सिर्फ कोविड अस्पताल में चौथी मंजिल पर बेड की व्यवस्था कराई गई। अभी तक वहां न तो ऑक्सीजन की पाइप लाइन का काम पूरा हो सका और न ही कोई अन्य संसाधन उपलब्ध हो सके हैं। सिर्फ बेड डालकर छोड़ दिया गया है। इसी तरह सीएचसी-पीएचसी पर व्यवस्थाएं धड़ाम है।
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आक्सीजन के दो प्लांटों में सिर्फ फाउंडेशन हो सके तैयार
स्वास्थ्य विभाग वार्ड तैयार करना तो दूर जिले में स्वीकृति ऑक्सीजन प्लांट को भी शुरू नहीं कर सका है। सिर्फ दो अगस्त को माधोटांडा सीएचसी पर लगे प्लांट का उद्घाटन हो सका है। जबकि जिला संयुक्त अस्पताल में बन रहे दोनों प्लांटों का सिर्फ फाउंडेशन ही तैयार हो सके हैं।
शासन से भी नहीं मिल सके उपकरण
तीसरी लहर से निपटने के लिए शासन से वेंटिलेटर, डीफेब्रेलेटर, वाइ पाइप, पीडियाट्रिक वेंटिलेटर मिलना था। इसकी डिमांड भी शासन को भेज दी गई है, लेकिन अब तक कोई सामान उपलब्ध नहीं हो सका है।
बच्चों का मन बहलाने का भी इंतजाम नहीं
इन वार्डों में भर्ती होने वाले बच्चे परेशान न हों और उनका मन लगा रहे, इसका भी ख्याल रखा जाएगा। दीवारों, दरवाजों एवं खिड़कियों पर रंगीन पर्दे, कार्टून कैरेक्टर्स आदि बनाए जाएंगे। खिलौनों आदि के इंतजाम पर भी विचार किया जा रहा है। जल्द रिकवरी के लिए अच्छा माहौल देने का प्रयास किया जाएगा। माता-पिता एवं अभिभावकों के लिए रैन बसेरा या अस्पताल में खाली बेड की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन इसे लेकर भी कोई तैयारी नहीं की गई है।
बाल रोग विशेषज्ञ के अभाव में इलाज का दावा
तीसरी लहर के बीच संसाधन के अलावा सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों की कमी भी बनेगी। जिले में मात्र सात बाल रोग विशेषज्ञ ही हैं। इनमें दो जिला पुरुष अस्पताल, एक महिला अस्पताल और दो डॉक्टर सीएमओ के अधीन हैं। एक-एक बीसलपुर सीएचसी और पूरनपुर सीएचसी पर कायर्रत हैं। जबकि शून्य से लेकर 10 साल के उम्र वाले बच्चों की संख्या ही 6.40 लाख से अधिक है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का तर्क है कि सर्जन, फिजीशियन, एमडी मेडिसन वाले डॉक्टरों की ट्रेनिंग कराई जा चुकी है और उन्हें ही कोविड वार्ड में लगाया जाएगा।
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