फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गरीबी की मार : तेजाब हमले के शिकार हुए पिता के इलाज के लिए पैसे नहीं, छेड़खानी पीड़िता की दर्दनाक कहानी

Thu, 30 Jun 2022 01:37 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, पीलीभीत

सार

छेड़खानी पीड़िता के माता-पिता पर तेजाब हमले का मामले में जो सच सामने आ रहा है वो काफी तकलीफ देने वाला है। 15 हजार रुपयों की कमी के चलते पिता की आंख का ऑपरेशन रुका हुआ है। मां की पहले ही मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

गरीबी की चौतरफा मार। पहले किशोरी के साथ छेड़खानी हुई। विरोध किया तो माता-पिता पर तेजाब से हमला हुआ। मां की जान चली गई। एक महीने से ज्यादा हो गया पिता अस्पताल में भर्ती हैं। अब आर्थिक तंगी में उनकी आंख का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा। किशोरी ने एसपी से मदद की गुहार लगाई है। गजरौला थाना क्षेत्र के एक गांव में 23 अप्रैल को किशोरी के साथ एक युवक ने छेड़खानी की। घर वाले जब पुलिस के पास तहरीर लेकर पहुंचे तो रिपोर्ट नहीं लिखी गई। 

विज्ञापन


एसपी के हस्तक्षेप के बाद छह मई को रिपोर्ट दर्ज की गई तो आरोपी ने समझौते का दबाव बनाया। समझौता न करने पर नौ मई की रात को पीड़ित किशोरी के माता-पिता पर आरोपी और उसके सहयोगियों ने तेजाब से हमला कर दिया। इस हमले में पीड़िता की मां की जान चली गई। किशोरी ने बताया कि पहले उसने मां को खोया, अब पिता की सेहत खतरे में है। एक आंख की रोशनी चली गई। दूसरी आंख का ऑपरेशन होना है पर रुपये नहीं है।

किशोरी के फूफा अस्पताल में उसके पिता की फूफा देखभाल कर रहे हैं। फूफा से डॉक्टर ने दो दिन पहले बताया है कि ऑपरेशन के लिए 15000 रुपये चाहिए। अब तक हुए इलाज के 3.5 लाख रुपये बकाया हैं। पहले उसे जमा करें तब आंख का ऑपरेशन हो पाएगा। आंख में जख्म और मवाद होने के बाद भी आपरेशन नहीं किया जा रहा है। सिर्फ दवाई देकर काम चलाया जा रहा है। इस विषय में शनिवार को किशोरी एसपी पीलीभीत के कार्यालय में अपने चाचा के संग गई थी। एसपी नहीं मिल सके तो उनके कार्यालय में हालत बयां करते हुए प्रार्थना पत्र दिया है।
विज्ञापन


सात लोग हैं जेल में 
छेड़खानी का आरोपी राजेश, उसके पिता रोशनलाल, सगे भाई गुड्डू अलावा अजय कुमार, छोटेलाल, हरीशंकर और रामकृष्ण जेल में हैं।

‘पुलिस ने अब तक इलाज के लिए आर्थिक मदद दी है। अगर 15000  रुपये की वजह से आंख का ऑपरेशन रुक रहा है तो उसे भी कराएंगे। इस बीच शासन से मदद दिलाने के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया है।’

विज्ञापन

- दिनेश कुमार पी., पुलिस अधीक्षक

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें