पीलीभीत। काफी ऊंची कीमतों में खरीदे जाने वाले विदेशी नस्ल के कुत्तों पर इन दिनों पार्वो वायरस का हमला हो गया है। वे तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। खास बात ये है कि ये वायरस की उनकी मौत का कारण बन रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस वायरस की चपेट में आने वालों की मुत्युदर 90 फीसदी तक है। फिलहाल सभी पशु चिकित्साधिकारियों को लोगों जागरूक करने को कहा गया है।
पिछले कुछ समय से विदेशी नस्ल के कुत्ते पालने का चलन तेजी से बढ़ा है। एक पपी की कीमत बीस से तीस हजार तक होती है। ज्यादातर शहर और कस्बों में ही इनको पालने का चलन है। महंगी कीमतों पर खरीदे गए ये बच्चे अब उनके पालकों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। वायरस की चपेट में आने के बाद एक सप्ताह के भीतर ही उनकी मृत्यु हो जा रही है। पूरनपुर क्षेत्र के एक पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार पिछले एक महीने में इस वायरस से करीब एक दर्जन से ज्यादा पपी की मौत हो गई। जिला मुख्यालय पर भी रोजाना दस से ज्यादा केस सामने आ रहे हैं।
जिला पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि वायरस की चपेट में कुत्तों के मुकाबले उनके बच्चे ज्यादा आ रहे हैं। इसमें उनको उल्टी होती है, मल में खून आता है। समय पर इलाज न मिले तो एक सप्ताह के भीतर उसकी मौत हो सकती है। पार्वो वैक्सीन से ही इनका बचाव किया जा सकता है जो प्राइवेट में ही मिलती है। वहीं अनुमान लगाया जा रहा है कि इस वायरस की चपेट में आने से जिले में करीब पांच सौ पिल्लों की मौत हो चुकी है।
देसी पिल्लों में भी पार्वो वायरस पहुंचने का खतरा बढ़ा
अभी तक सिर्फ विदेशी नस्ल के पिल्लों में ये वायरस मिल रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि देसी कुत्ते के बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। रेबीज का वायरस काटने से फैलता है लेकिन पार्वो हवा से फैलता है। अगर कोई संक्रमित पिल्ला बाकी के संपर्क में आएगा तो ये वायरस उसके शरीर में भी पहुंच सकता है। हालांकि जिले में अभी तक देसी पिल्लो में इस वायरस की पुष्टि नहीं हुई है।
विदेशी नस्ल के कुत्तों में पार्वो वायरस मिल रहा है। सभी पशु चिकित्साधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं कि उनके यहां जो भी विदेशी नस्ल कुत्तों को रेबीज वैक्सीन लगवाने आएं उनको पार्वो वायरस की वैक्सीन लगवाने की भी सलाह दें। यह वैक्सीन प्राइवेट में ही मिलेगी। इस वायरस में मृत्युदर 90 फीसदी है।
- अरविंद गर्ग, जिला पशु चिकित्साधिकारी