फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गिरफ्तारी की मांग पर अडिग हुए किसान तो कई दौर हुई वार्ता

विज्ञापन
विज्ञापन
पूरनपुर। लखीमपुर में धरना प्रदर्शन समाप्त होने के बाद अफसरों को बंडा चौराहा पर चल रहे धरना प्रदर्शन को समाप्त कराने को भारी मशक्कत करनी पड़ी। कई बार अगुवाई कर रहे नेताओं को बुलाकर एसडीएम, सीओ ने वार्ता की। मगर अधिकांश प्रदर्शनकारी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक धरना प्रदर्शन समाप्त नहीं करना चाह रहे थे। इसके लिए धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से कई बार हाथ उठवाकर उनकी राय ली गई। अधिकांश प्रदर्शनकारी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक धरना प्रदर्शन जारी रखने के मूड में थे। हालांकि बाद में अगुवाई कर रहे लोगों ने संयुक्त किसान मोर्चा के निर्णय का हवाला देकर धरना प्रदर्शन समाप्त कराया। साथ ही समस्या पर फिर एकत्र होकर धरना प्रदर्शन का निर्णय लिया गया।
विज्ञापन

धरना प्रदर्शन में दूसरे दिन महिलाओं ने भी की भागीदारी
लखीमपुर की घटना के विरोध में धरना प्रदर्शन में तमाम महिलाएं घर का काम छोड़कर प्रदर्शन करने पहुंची। अधिकांश महिलाएं आरोपियों की गिरफ्तारी न होने तक आंदोलन जारी रखने के मूड में थी।
बंडा चौराहा पर चल रहे धरना प्रदर्शन में दूसरे दिन सोमवार को अपराह्न 12 बजे से महिलाओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जो धरना समाप्त होने पर अपराह्न चार बजे तक जारी रहा। खालसा निवास की इंद्रजीत कौर खालसा ने अपने संबोधन में घटना की निंदा की। साथ ही कहा कि ऐसी सरकार को अब नहीं बनने दिया जाएगा। जो किसान विरोधी हो। धरना समाप्त करने को प्रदर्शनकारियों से हाथ उठवाकर जानी गई राय पर महिलाओं ने समझौता से असंतुष्टि व्यक्त कर हाथ नहीं उठाए। उनका कहना था कि जान के बदले चाहे उसके वजन के बराबर हीरे तौल दिए जाए। मगर किसी की जान वापस नहीं आ सकती। प्रदर्शनकारी महिलाएं हत्यारोपी की गिरफ्तारी न होने तक आंदोलन जारी रखना चाहती थी। हालांकि बाद में प्रदर्शन की अगुवाई करने वालों के समझाने पर धरना प्रदर्शन समाप्त किया गया। मगर शीघ्र ही आरोपियों की गिरफ्तारी न होने आदि पर फिर आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया गया।
विज्ञापन

किसान अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्वक ढंग से आंदोलन कर रहे है। किसानों पर जुल्म ढहाए जा रहे हैं। लखीमपुर में तो कई किसानों की हत्या कर दी गई। अब अधिकांश महिलाएं परिवार के साथ धरना देने बंडा चौराहा पर आई है। जब तक किसानों को न्याय नहीं मिल जाता। तब तक उनके साथ कंधे से कंधा मिलकर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। - मंजीत कौर, आंदोलनकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें