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खिलाड़ी बोले- हॉकी में पदक जीतने का सपना कैसे हो साकार, स्टेडियम कोच नहीं है सरकार

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पीलीभीत के गांधी स्टेडियम में इन खिलाड़ियों को है कोच का इंतजार। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पीलीभीत। जोश और जज्बा है लेकिन कोच नहीं है। कौन सिखाए खेल की बारीकियां? यह सवाल हर रोज उठता है पीलीभीत के उन हॉकी खिलाड़ियों के मन में जो गांधी स्टेडियम में सुबह-शाम अभ्यास करने जाते हैं। खिलाड़ियों का कहना है कि हॉकी में पदक जीतने का उनका भी सपना है, पर यह साकार कैसे हो? स्टेडियम में तो कोच ही नहीं है। अब सरकार ही बताए कब तक कोच की तैनाती की जाएगी।
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जैसे मेजर ध्यानचंद की वजह से हॉकी में झांसी की पूरे विश्व में पहचान बनी है। उसी तरह से टोक्यो ओलंपिक में भारत हॉकी का पदक दिलाने में अहम योगदान करने वाले मझोला निवासी सिमरनजीत सिंह के खेल की बदौलत पीलीभीत का नाम भी देश-विदेश तक पहुंचा है। सिमरनजीत सिंह को मॉडल मानकर तमाम युवा हॉकी स्टिक लेकर उतरे और हर रोज खेल का अभ्यास कर रहे हैं लेकिन उन्हें कोच की कमी अखरती है। मजबूरन वह अपने वरिष्ठ खिलाड़ियों से टिप्स लेकर अभ्यास करते हैं लेकिन कोच हो तो निश्चित ही खिलाड़ी निखर सकेंगे।
खिलाड़ी बोले- सबसे पहले हो कोच की तैनाती
स्टेडियम में शुक्रवार शाम 4.30 बजे खेल का अभ्यास करा रही राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी प्रगति सिंह से जब पूछा गया कि सबसे बड़ी दिक्कत क्या है? वह बोलीं- एक वर्ष से कोच नहीं है। युवराज सिंह ने सवाल किया कि जब कोच नहीं है और ग्राउंड भी तैयार नहीं है तो फिर प्रतिभा निखरेगी कैसे? सुनीता कुमारी ने कहा कि खेलो इंडिया की थीम को सफल बनाना है तो सबसे पहले की कोच की तैनाती की जाए।
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ओलंपिक में पदक जीती थी भारतीय टीम
भारतीय हॉकी टीम ने 41 साल बाद ओलंपिक में पदक हासिल कर लिया है। भारत ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक के मुकाबले में जर्मनी को हरा दिया। मैच में शुरुआत में पिछड़ने के बाद भारत ने जोरदार वापसी की और जर्मनी के खिलाफ मैच को 5-4 से जीत लिया। इससे पहले आखिरी बार हॉकी में टीम इंडिया ने 1980 में ओलंपिक मेडल जीता था। इस जीत में सिमरनजीत सिंह का अहम योगदान था।
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