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झोलाछाप बी फार्मा के डिप्लोमा पर चला रहा था क्लीनिक

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पीलीभीत। नवीन कुमार शुक्ला के पास केवल बी फार्मा का डिप्लोमा है। उसने मेडिकल स्टोर चलाने का लाइसेंस भी नहीं लिया था। वह पिछले करीब एक साल से इलाज के नाम पर मरीजों से धन वसूली कर रहा था। रिपोर्टर अपनी टीम के साथ पिछले चार दिनों से पड़ताल में जुटे थे। रिपोर्ट ने फोन पर कोविड मरीज का तीमारदार बनकर झोलाछाप बात की। उसने खुद को एल-2 अस्पताल का डॉक्टर बताने के साथ कोविड मरीजों का इलाज करने की बात कही थी।
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स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन के मुताबिक बी फार्मा के डिप्लोमा पर सिर्फ मेडिकल स्टोर चलाया जा सकता है। मेडिकल स्टोर के लिए भी ड्रग लाइसेंस लेना पड़ता है। खास बात यह कि नवीन कुमार पिछले एक साल से इलाज और ऑपरेशन करने के नाम पर मरीजों को लूट रहा था, लेकिन विभाग इससे अनजान बना रहा। शुक्रवार को मामले का खुलासा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने झोलाछाप की क्लीनिक को सील करने के बाद अपनी आख्या डीएम और सीएमओ को भेज दी है।
इस तरह हुआ फोन पर खुलासा
रिपोर्टर - डॉक्टर साहब मरीज को दिखना है।
झोलाछाप- अभी नहीं कल क्लीनिक पर लेकर आना
रिपोर्टर- मरीज एल-2 कोविड अस्पताल में भर्ती है।
झोलाछाप - उसकी छुट्टी करा लो और क्लीनिक पर लेकर आओ फिर चेकअप करता हूं
रिपोर्टर- छुट्टी कैसे होगी
झोलाछाप- अस्पताल में बोल दो, मैं अपने मरीज को घर ले जाना चाहत हूं और छुट्टी करा लो।
रिपोर्टर- डॉक्टर साहब आप एल-2 कोविड अस्पताल में किस टाइम पहुंचेंगे।
झोलाछाप- वहां मुझे बुलाया जाता है, मैं दो तीन घंटे के लिए जाता हूं, हस्ताक्षर करके चला आता हूं।
रिपोर्टर- फिर साहब कैसे होगा।
झोलाछाप- अगर वहां आपका मरीज ठीक है, तो वहां रखो, वरना मेरे पास लेकर आओ
रिपोर्टर - वहां आराम नहीं है।
झोलाछाप- सुबह क्लीनिक पर मरीज ले आओ
रिपोर्टर- अगर आज रात में आप कोविड अस्पताल में मिलेंगे।
झोलाछाप- मुझे फोन करके बुलाते हैं, अभी फोन करके पूछता हूं, अगर आता हूं, तो देख लूंगा।
झोलाछाप के पास मिली फर्जी मुहर
झोलाछाप के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा तो वहां दवाओं और उपकरण के अलावा एक मुहर मिली। उस पर एक एमबीबीएस और एमडी डॉक्टर का नाम लिखा है। इसके अलावा मुहर पर शहर में अमरिया रोड स्थित एक हॉस्पिटल का रजिस्टे्रशन नंबर लिखा है। टीम ने मुहर के बारे में पूछा तो झोलाछाप ने फर्जी बताई।
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छापे के दौरान यह मिला सामान
शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे पूरनपुर एमओआईसी डॉ. प्रेम सिंह राजपूत, ड्रग इंस्पेक्टर बबिता रानी और आयुष के डॉक्टर मनोज कुमार ने झोलाछाप के क्लीनिक पर छापा मारा। उस वक्त झोलाछाप के क्लीनिक पर एक मरीज मौजूद था। झोलाछाप मरीज को नेबूलाइजर लगाकर इलाज कर रहा था। स्वास्थ्य टीम ने मरीज को इलाज के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया। टीम को मौके एक नेबूलाइजर मशीन, ग्लूकोमीटर, पल्स ऑक्सीमीटर, बीपी मशीन, सर्जिकल उपकरण, किडनी ट्रे, मेडिसन एंटीबयोटिक, ओपीडी स्लिप, लैब की रिपोर्ट मिली। टीम ने सभी सामान कब्जे में ले लिया। इसके बाद क्लीनिक को सील कर दिया गया। हालांकि मौके पर टीम को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिला।
मरीज से इंजेक्शन के वसूले थे 20 हजार रुपये
गजरौला नदाह गांव के रहने वाले संजीव कुमार उर्फ संजू ने बताया कि 15 दिन पहले उनकी तबीयत खराब हुई थी। इस पर झोलाछाप के पास इलाज करने के लिए गए थे। जहां उसने उनकी कोरोना की जांच कराई। इसके बाद उन्हें पॉजिटिव बताते हुए इंजेक्शन लगाने की बात कही। झोलाछाप ने इंजेक्शन के नाम पर 20 हजार रुपये वसूल किए थे। इंजेक्शन लगने के बाद उसके शरीर पर दाने निकल आए थे। इस पर उन्होंने शहर के निजी अस्पताल के डॉक्टर से इलाज कराया। झोलाछाप ने उन्हें कौन सा इंजेक्शन लगाया था इसके बारे में उन्हें कुछ नहीं बताया था।
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