पीलीभीत। आज हम सोचें और कल सब हिंदी बोलने लगेंगे। यह नहीं हो सकता है। इसके लिए लगातार छोटे-छोटे प्रयास करने होंगे। शुरुआत भले ही छोटी लगेगी, मगर आगे चलकर साकार होगी। जरूरी है कि बच्चों के पाठ्यक्रम में हिंदी अनिवार्य विषय के तौर पर शामिल हो। बच्चों को हिंदी में बोलने के साथ ही लिखने और पढ़ने का भी ज्ञान हो। तब अंग्रेजी की शुरुआत होनी चाहिए। शिक्षकों का कहना है कि जब बचपन से ही बच्चों को संस्कार सिखाने की मुहिम शुरू करेंगे तभी वह हिंदी को समझ सकेंगे। अभिभावक भी घर में बच्चों के साथ हिंदी में बात करें। तब हिंदी को हम बढ़ावा दे सकते हैं।
हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए बचपन से ही बच्चों को हिंदी के बारे में बताएं और उनसे हिंदी में ही संवाद करें। अंग्रेजी सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा को भी विकसित जरूर करें। - रजनी जौहरी, शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय गनेशपुर गौंटिया
हिंदी में हस्ताक्षर करने का छोटा सा प्रयास भी बड़े बदलाव की वजह बन सकता है। आने वाली पीढ़ी को हिंदी पढ़ने के साथ उन्हें हिंदी के महत्व को भी समझाएं। तभी देश में हिंदी भाषा उन्नति कर सकती है। - विनीश शर्मा, प्राथमिक विद्यालय नरायन नगला