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धान खरीद का हाल- आढ़तें गुलजार, सरकारी क्रय केद्रों पर पसरा सन्नाटा

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पीलीभीत। धान की खरीद से किसानों को अभी तक समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाया। यही वजह है कि क्रय केंद्र सूने पड़े हैं। मंडी में आढ़ती कम दाम पर धान खरीद रहे है। जबकि इस बार धान सरकारी खरीद के लिए क्रय केंद्र गत वर्ष से अधिक बनाए गए हैं, पर अभी तक सभी क्रय केंद्र चालू नहीं हुए। जबकि खरीद सत्र के 13 दिन बीत गए हैं।
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धान खरीद से बिचौलियों को हटाने और किसानों को समर्थन मूल्य दिलाने का दावा खरा नहीं उतर रहा है। पीलीभीत मंडी में कई क्रय केंद्र बुधवार को भी सूने पड़े रहे। जबकि आढ़ती और राइस मिल मालिकों के यहां धान बेचने वालों की कतार है। पहली अक्तूबर से शुरू हुई धान की खरीद में अव्यवस्थाएं हावी रहीं। पहली अक्तूबर से 86 क्रय केंद्रों से खरीद की शुरूआत की गई थी। इसके बाद लगातार केंद्रों की संख्या बढ़ती रही। मौजूदा समय में 141 क्रय केंद्र जिले भर में बनाए गए हैं। हालांकि 12 अक्तूबर तक 90 क्रय केंद्रों पर 295.22 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। अभी तक 51 केंद्र शुरू नहीं हो सके है। डीएम ने भी एक दिन पहले क्रय केंद्रों का हाल जाना। क्रय नीति के विषय में जागरूकता पैदा करने की जिम्मेदारी जिलाधिकारी ने लेखपालों को सौंपी है। लेकिन हकीकत यह है कि 50 क्विंटल की तौल की सीमा और धान के मानकों को लेकर लगाईं गईं शर्तों के चलते किसान सरकारी क्रय केंद्रों से परहेज कर रहे हैं और आढ़ती को 600 रुपये प्रति क्विंटल कम पर अपना धान बेच रहे हैं।
पूरनपुर के क्रय केद्रों पर भी नहीं दिखे किसान
पूरनपुर। मंडी में धान खरीद केंद्रों पर धान की बिक्री के तय मानकों को लेकर किसान परेशान नजर आए। वे तमाम झंझटों से बचने के लिए खरीद केंद्रों न पहुंचकर व्यापारियों को कम रेट पर मजबूरन धान की बिक्री कर रहे हैं। इसके अलावा खरीद केंद्र पहुंचने वाले अधिकांश किसानों को मानक के अनुरूप धान न होना बताकर टरकाया जा रहा है। गुड़ मंडी में लगाए गए छह खरीद केंद्रों पर अभी तक एक भी खरीद केंद्र पर धान का एक दाना भी नहीं खरीदा गया है। सभी खरीद केंद्रों पर सन्नाटा है। इसमें तीन खरीद केंद्रों पर तो मात्र बैनर टांगकर छोड़े गए हैं। बुधवार को इन खरीद केंद्रों पर कोई कर्मचारी तक मौजूद नहीं रहा। अन्य खरीद केंद्रों पर मौजूद मिले कर्मचारियों ने बताया कि उन लोगों के खरीद केंद्र का अब तक कोई टोकन जारी नहीं हुआ है। इससे खरीद शुरू नहीं हो सकी। मंडी समिति लगाए गए खरीद केंद्रों में चार-पांच खरीद केंद्रों पर ही खरीद हो रही है। दूसरी ओर आढ़तों पर धान के ढेर लगे है। राइस मिलों में भी सुबह पांच बजे से धान से भरे वाहनों की लाइनें लगनी शुरू हो जाती हैं। संवाद
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दो सप्ताह बाद भी उपलब्ध नहीं कराया वारदाना, कैसे हो खरीद
बीसलपुर। मंडी परिसर में लगे पीसीएफ के राजकीय धान क्रय केंद्रों पर 13 दिन बाद भी वारदाना नहीं आ पाया है। इससे साफ जाहिर है कि अधिकारी धान की तौल कराने के प्रति गंभीर नहीं हैं।
मंडी परिसर में पहली अक्तूबर को अन्य संस्थाओं के अलावा पीसीएफ के छह राजकीय धान क्रय केंद्र स्थापित किए गए थे। उसके बाद पीसीएफ का ही एक और राजकीय धान क्रय केंद्र खुल गया था। कुल मिलाकर मंडी परिसर में अकेले पीसीएफ के सात राजकीय धान क्रय केंद्र हो गए हैं। इन केंद्रों पर अन्य सुविधाएं तो सुनिश्चित हैं लेकिन वारदाना अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे इन केंद्रों पर धान की तौल होने की कोई संभावना नहीं है। इससे साफ जाहिर है कि संबंधित अधिकारी राजकीय क्रय केंद्रों पर किसानों का धान तुलवाने में कितनी रुचि रख रहे है। यदि इन केंद्रों पर कोई किसान धान लेकर आएगा, तो उसका धान कैसे तुल पाएगा। इस बात का जवाब देने वाला कोई अधिकारी नहीं है। इस बीच प्रशासन, राजस्व, विपणन और सहकारिता विभाग के कई अधिकारियों ने क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिससे पीसीएफ के क्रय केंद्रों पर अभी तक वारदाने की व्यवस्था नहीं हो पाई है। संबंधित अधिकारियों की हीला हवाली के चलते इन केंद्रों पर यह हालात भविष्य में कब तक बने रहेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। पीसीएफ के केंद्रों पर नियंत्रण रखने वाले सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) करण सिंह ने बताया कि बहुत जल्द मंडी के सातों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगे पीसीएफ के दोनों राजकीय धान केंद्रों पर आवश्यकतानुसार वारदाना उपलब्ध करा दिया जाएगा। संवाद
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