उत्तर प्रदेश में सरयू घाटों और मखौड़ा मार्ग पर फोर्स के साथ डटे अफसरों को शुक्रवार दोपहर बाद झटका लगा, जब अयोध्या के कारसेवकपुरम् में 84 कोसी परिक्रमा समापन का यज्ञ शुरू हो गया।
आननफानन में आला अफसरों ने शासन को सूचना दी लेकिन कारसेवकपुरम् में घुसने की इजाजत नहीं दी गई। भारी फोर्स के साथ अधिकारी गेट पर डटे रहे।
आला अफसरों का कहना था कि हवन के बाद यदि श्रीरामजन्मभूमि दर्शन करने जाएंगे तो रोक कर गिरफ्तार कर लिया जाएगा पर विहिप ने अंदर ही यज्ञ के बाद जयकारा लगा प्रेसवार्ता करके चुप्पी साध ली।
प्रतिबंधित 84 कोसी परिक्रमा के समापन पर विहिप की रणनीति भारी फोर्स के साथ अधिकारियों की सक्रियता देख न घाटों पर जाने की रही, न ही कारसेवकपुरम् से बाहर आने की।
मखौड़ा स्थित रामजानकी मंदिर में ही पूजन व भंडारे की औपचारिकता पूरी कर ली गई जबकि पूर्णाहुति को लेकर विहिप ने कारसेवकपुरम् में ही यज्ञकुंड सजाया।
उड़ीसा के संत स्वामी अजी चैतन्य, चंद्रपाणि दास, महेश दास, वामदेव दास, रघुनाथ दास, नीलकंठ दास, श्यामलाल दास, जितेंद्र मंडल दास, स्वामी रामदेवानंद सरस्वती ने मंत्रोच्चार के साथ विधिवत समापन कराया। इस दौरान नजरबंदी तोड़ दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास भी यज्ञ में शामिल हुए।
दोपहर बाद तीन बजे शुरू हुई यज्ञ का समापन डेढ़ घंटे बाद साढ़े चार बजे हुआ। इसके बाद परिसर में जयकारे लगे।
इस दौरान विहिप के केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम नारायण सिंह, राजेंद्र सिंह पंकज, सहमंत्री हरिशंकर, प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा और कारसेवकपुरम् प्रभारी प्रकाश अवस्थी समेत दर्जनों लोग मौजूद थे।
एसएसपी केबी सिंह ने कहा कि धारा 144 का पूरा पालन हुआ है। विहिप घर में पूजा-पाठ कर ले, कोई भी दावा करे तो क्या फर्क पड़ता है।
प्रशासन ने निषेधाज्ञा के पालन में 25 अगस्त को परिक्रमा शुरू नहीं होने नहीं दी थी, और शुक्रवार को भी अयोध्या में समापन का कोई कार्यक्रम भी नहीं होने दिया है।