अपना ‘घर’ छूटने के बाद मछलियां टेंशन में आ जाती हैं और घबराहट में वह छटपटाते हुए जिंदगी की आस में संघर्ष करती हैं। पानी से निकालने के बाद मछलियों का शरीर जान बचाने केलिए संघर्ष में इतना रसायन छोड़ता है कि उनका स्वाद ही बिगड़ जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो जिंदा देखकर ताजी मछली लोग इन्हें समझते जरूर हैं लेकिन स्वाद में यह बर्फ वाली मृत मछली से बेहतर नहीं होतीं।
सेहत के लिए लाभकारी होने केअलावा मछली के तेल से बनी दवा हृदय के लिए कारगर है लेकिन शायद कम लोग जानते हैं कि मछलियों का टेंशन हर उत्पाद को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश के मत्स्य विभाग ने इस पर व्यापक शोध किया है।