विश्वविद्यालयों में रिक्त शिक्षकों के पद अब जल्द भी भरे जाएंगे। शासन ने आरक्षण के नए रोस्टर के अनुसार विश्वविद्यालयों में नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया है। अब विश्वविद्यालय को एक इकाई मानते हुए अध्यापकों के आरक्षित पद निर्धारित होंगे और उनके हिसाब से ही विज्ञापन भी जारी होंगे।
बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने विभागवार आरक्षण निर्धारित करते हुए अध्यापकों के रिक्त पदों पर विज्ञापन जारी किया था। शासन के निर्देश के बाद विश्वविद्यालय नए सिरे से विज्ञापन जारी करेंगे।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में अध्यापकों के स्वीकृत 112 पदाें में से 77 पद रिक्त चल रहे हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय में 35 शिक्षक ही बचे हैं बाकी अतिथि अध्यापकों के भरोसे अध्यापन का कार्य चल रहा है। इसमें दस शिक्षकों को प्राक्टोरियल बोर्ड, वार्डेन एवं विभिन्न कमेटियों की जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इसके कारण पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा था। इसको देखते हुए विश्वविद्यालय ने अध्यापकों के 74 पदों पर चार जून को विज्ञापन जारी किया था। हालांकि आरक्षण के नए मानक के पेच से नियुक्ति नहीं हो सकी। वहीं काशी विद्यापीठ में अध्यापकों के करीब 58 पद रिक्त चल रहे हैं।
इन पदों पर नियुक्ति के लिए विद्यापीठ ने विज्ञापन भी जारी किया था लेकिन आरक्षण के नए मानक के चलते भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त महामंत्री ने कुलाधिपति को पत्र लिखकर नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अध्यापकों की नियुक्ति में विश्वविद्यालय हीलाहवाली कर रहे हैं।