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पैमाइश के बिना कर दी मेड़बंदी

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मुजफ्फरनगर। नूनाखेड़ा के किसान इंद्रकुमार का आरोप है कि सिस्टम की बेहयाई से तंग आकर ही उसने जहर खाया है। आरोप है कि लगातार मांग के बाद भी चकबंदी विभाग के कर्मचारियों ने उसकी जमीन की पैमाइश नहीं कराई है। विभाग के लोग विपक्षी किसानों के दबाव में काम कर रहे हैं। मजबूरन उसे जान देने का निर्णय लेना पड़ा।
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सिस्टम को जगाने के लिए इंद्रकुमार को कीटनाशक पीना पड़ा। सुबह दफ्तर खुलते ही इंद्रकुमार अपने पिता सुरेश और चचेरे भाई ओमवीर के साथ कलक्ट्रेट पहुंच गया था। यहां जब इन लोगों ने देखा कि चकबंदी अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे हैख् तो प्रशासन को जगाने के लिए उसने कीटनाशक दवा पी ली। आरोप है कि बिना पैमाइश के उसकी जमीन में मेड़बंदी की जा रही है। वह कई बार जमीन की पैमाईश कराने का प्रार्थना पत्र दे चुका है। उसके पिता सुरेश के नाम 27.50 बीघा जमीन है। उनकी जमीन पूरी कर दे उन्हें ओर कोई मतलब वास्ता नहीं है।
बिना पैमाइश के अपनी ईख की खड़ी फसल में मेड़बंदी नहीं होने देंगे। इंद्रकुमार के भाई विपिन कुमार ने बताया कि शाम तक उसे होश नहीं आया था। उसकी हालत नाजुक बनी है। वहीं इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम सीबी सिंह ने एसओसी चकबंदी और एसडीएम सदर दीपक कुमार को नूनाखेड़ा गांव में मौके पर भेजा है, दोनो अधिकारियों को वास्तविक स्थिति बताने के लिए कहा गया है।
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फरवरी में पूरा हो चुका सीमांकन का कार्य
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि नूनाखेड़ा गांव में चकबंदी का कार्य पूरा हो चुका है। फरवरी में सीमांकन की प्रक्रिया हो चुकी है। इंद्रकुमार का चक सेक्टर 16 में हैं। मेड़ डालकर किसानों को कब्जा दिया जा चुका है। इस सेक्टर के किसान सोहनवीर ने शिकायत की थी कि सीमांकन के बाद भी उसे कब्जा नहीं मिला है। इंद्र कुमार के परिवार ने अपनी मेड़ बंदी नहीं छोड़ी है। सुरेश की शिकायत पर डीडीसी ने तीन बार कमेटी गठित की। दो दिन पहले एसओसी ने मौके पर जाकर मेड़ लगवाई। इंद्रकुमार को छोड़ बाकी सभी लोग संतुष्ट थे। उसने गत दिवस डीएम के ऑफिस में दोबारा पैमाइश के लिए प्रार्थनापत्र दिया। एडीएम ने बताया कि खड़े ईख में जो मेड़ बंदी हुई है वह इंद्रकुमार के सह खातेदार मुकेश के खेत में हुई है, इसके गन्ने का मुआवजा सोहनवीर देने को तैयार है। इंद्र कुमार का खेत तो छेड़ा भी नहीं गया है।
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