मुजफ्फरनगर। एक मार्च 1989 की रात। भोपा थाना क्षेत्र के सीकरी गांव से नईमा का घर से ही अपहरण कर लिया गया। दिन निकला तो शोर मचा। पुलिस तक मामला पहुंचा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। पांच महीने गुजर गए। आखिरी उम्मीद में पीड़ित परिवार ने सिसौली पहुंचकर भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत से मुलाकात की। तीन अगस्त से भोपा में शुरू हुआ ऐतिहासिक आंदोलन। 11 अगस्त को नईमा का गोली लगा शव बरामद हुआ। जहां किसान बैठे थे, आज भी वहीं पर नईमा की मजार है।
सीकरी की जमीला ने छोटी बेटी नईमा का निकाह बड़ी बेटी नसरीन के देवर के साथ किया था। घर में गौने की तैयारी चल रही थी, लेकिन अपहरण की वारदात हो गई। उम्मीद के हर दरवाजे पर जमीला ने दस्तक दी। पुलिस ने नहीं सुनी। जनप्रतिनिधि भी मदद नहीं कर सके। तत्कालीन भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने तीन अगस्त से 10 अक्तूबर 1989 तक भोपा में ऐतिहासिक आंदोलन चलाया। बेटी के लिए शुरू की गई लड़ाई में सर्वसमाज के लोग एकजुट हो गए। गिरफ्तारियां दी गईं।
-
इस तरह बरामद हुआ था शव
भोपा में गंगनहर पर भाकियू का आंदोलन चल रहा था और 11 अगस्त 1989 को रतनपुरी क्षेत्र के बड्सू में गंगनहर के पास नईमा का गर्दन में गोली लगा शव बरामद हुआ। चिट्ठी मिली, जिस पर लिखा था कि नईमा को जिंदा नहीं छोड़ सकते। पोस्टमार्टम कराया गया तो पीड़िता चार माह की गर्भवती निकली। साफ हो गया कि अपहरणकर्ताओं ने दुष्कर्म किया। 12 अगस्त को भाकियू के झंडे में लपेटकर आंदोलन स्थल के निकट ही सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।
-
एक हो गया था पश्चिम उत्तर प्रदेश
बागपत के माया त्यागी कांड के बाद महिलाओं के सम्मान के लिए भोपा का आंदोलन सबसे बड़ा रहा। ट्रैक्टर गंगनहर में फेंककर किसान जेल गए। रोज सुबह खेत का काम कर किसान दोपहर बाद पंचायत में पहुंचते थे। आंदोलनकारियों पर मुकदमा लिखा गया। कांग्रेस सरकार ने किसानों को नए ट्रैक्टर दिए और मांगे मान ली गई थी।
दस दिन रहे थे सोनभद्र जेल
फोटो
मोरना निवासी चौधरी हवा सिंह का कहना है कि वह आंदोलन के समय चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के साथ रहे। 10 दिन तक सोनभद्र की जेल में रहे थे। बेटी के लिए सर्वसमाज के लोगों ने आंदोलन किया था।
किसान खुद करते खाने का इंतजाम
फोटो
निरगाजनी निवासी धर्मपाल सिंह पंवार बताते हैं कि गंगनहर पर चले धरने में वह प्रतिदिन जाते थे। ग्रामीणों के सहयोग से धरने में खाने पीने का सामान लाते थे।
आंदोलन के कारण मिला था ट्रैक्टर
फोटो
निरगाजनी निवासी सुरेश पाल सिंह का कहना है कि आंदोलन के दौरान उनका ट्रैक्टर नहर में गिरा दिया गया था। वह जेल में गए थे। आंदोलन के कारण ही उन्हें ट्रैक्टर मिला था।
तब जिले में थे सरकार के दो मंत्री
दिलचस्प बात यह है कि जिस समय नईमा का अपहरण हुआ, तब मंत्रालय में जिले से दो मंत्री थे। खाद्य रसद विभाग हुकुम सिंह के पास था और गृह राज्यमंत्री सईदुज्जमां थे। सार्वजनिक तौर पर लोगों ने बार-बार सईदुज्जमां की भूमिका पर सवाल भी खड़े गए।