मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड के सामूहिक दुष्कर्म, छेड़छाड़ और लूटपाट के मामले में महिला गवाह का दर्द अदालत में छलक उठा। गवाह बोलीं कि उसके परिवार में परेशानी है, अब आरोपियों को पहचानना मुश्किल है। प्रकरण के समय यदि उसके हाथ में होता तो वह आरोपियों को जहर दे देती।
एक अक्तूबर 1994 की रात पृथक राज्य की मांग के लिए दिल्ली जा रहे उत्तराखंड के आंदोलनकारियों को पुलिस ने रामपुर तिराहे पर रोक लिया था। पुलिस फायरिंग में सात आंदोलनकारियों की मौत हुई थी। महिलाओं से छेड़छाड़ व दुष्कर्म के मामले भी सामने आए थे। इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई की तरफ से मुकदमे दर्ज कराए गए थे।
सोमवार को सरकार बनाम राधा मोहन द्विवेदी मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई। उत्तराखंड संघर्ष समिति के अधिवक्ता ने बताया कि चश्मदीद गवाह को कोर्ट में पेश किया गया। चश्मदीद ने कोर्ट में उपस्थित 10 आरोपियों को पहचानने से इंकार कर दिया। उसके पौत्र की कुछ दिन पूर्व मौत हुई है। इस कारण भी वह काफी परेशान है।
अधिक आयु और बीमार होने के कारण आरोपियों को पहचान पाने में असमर्थता जताई। वह कोर्ट में बोली घटना से उसकी बहुत बदनामी हुई थी। मामले में सुनवाई के लिए चार फरवरी की तिथि नियत की गई है। गौरतलब है कि गवाह ने पिछले दिनों फोटो के आधार पर पांच आरोपियों की पहचान की थी।