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श्रीकृष्ण ने सुदामा से सच्ची मित्रता निभाई: शास्त्री

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मुजफ्फरनगर। कथा व्यास आचार्य सत्य कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मित्रता में कोई छोटा-बडा नहीं होता। सच्ची मित्रता यही है कि मित्र के कहने से पहले हम उसकी पीड़ा को समझ जाएं। भगवान श्रीकृष्ण सच्चे मित्र हैं।
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केशवपुरी के लक्ष्मीनारायण मंदिर में चल रही भागवत कथा में श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब श्रीकृष्ण को यह मालूम होता है कि उसका मित्र सुदामा उससे मिलने आया है तो वह नंगे पैर अपने मित्र से मिलने दौड़ पड़ते हैं। सुदामा की दीन दशा देखते है तो उनकी आंखों में आंसू छलक जाते है। एक सच्चा मित्र अपने मित्र को कभी पीड़ा में नहीं देख सकता। मित्रता सच्ची है तो न कोई छोटा है न बड़ा है। न राजा है न रंक है। मित्रता सबको समान कर देती है। जहां मित्र के प्रति बराबरी का भाव नहीं है वहां सच्ची मित्रता नहीं है। कथा संयोजक विनय मित्तल, सतीश अग्रवाल, संदीप सिंघल, सुभाष मित्तल, अरुण गर्ग, सुरेश भगत, राकेश गर्ग, मोहनलाल गर्ग, नरेश मित्तल सभासद, अंकुर गोयल, संजीव कुमार, अशोक मित्तल, कैलाश अरोरा, संदीप तोमर, जसवीर बालियान, विपिन गोयल, अवनीश मित्तल, शिशुकांत गर्ग, डीपी गोयल मौजूद रहे।
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