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सत्तू एनकाउंटर: परिवार पर भी पिस्टल तान देता था सतपाल सत्तू, भांजा बोला- अपराधी था मामा, सही किया मार दिया

Wed, 24 Jun 2026 11:08 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर

सार

Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर की किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में वांछित सतपाल उर्फ सत्तू को पुलिस ने मार गिराया। दो गोलियां लगने और ज्यादा खून बहन से उसकी मौत हो गई। सतपाल से उसका परिवार भी परेशान था। 
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सतपाल सत्तू की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर में तितावी क्षेत्र के गांव की किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के आरोपी मुठभेड़ में मारे गए पंजाब की ओर से रणजी ट्रॉफी के दो मुकाबले खेल चुके सतपाल उर्फ सत्तू को दो गोली लगी थीं। अधिक खून बहने से सत्तू की जान गई। चंडीगढ़ से पहुंचे परिजनों ने भोपा रोड स्थित श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार कर दिया और वापस लौट गए।
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मूल रूप से पचैंड़ा गांव निवासी और वर्तमान में चंडीगढ़ के राम दरबार निवासी आरोपी सत्तू सोमवार रात पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ था। मंगलवार को उसकी मौत हो गई। सिविल लाइन थाना पुलिस ने उसके बेटे सुमित को कॉल कर जानकारी दी थी। पहले परिजनों ने आने से इन्कार कर दिया था।
 

पुलिस अधिकारियों ने चंडीगढ़ के सेक्टर-31 थाने में जानकारी दी। मृतक के परिजनों को मुजफ्फरनगर भिजवाने के लिए मदद मांगी। उनको बताया गया कि मुजफ्फरनगर पुलिस की मदद से सत्तू का मृत्यु प्रमाण पत्र बन सकता है जो भविष्य में पुलिस को दिखाने में काम आएगा। इसके बाद मंगलवार देर रात परिजन आने के लिए तैयार हुए। सुबह के समय पत्नी मोना, पुत्र सुमित कुमार, भांजा राजेश, बहन उषा सिविल लाइन थाने पहुंचे। पुलिस ने उन्हें मामले की पूरी जानकारी दी। इसके बाद मोर्चरी पहुंचकर परिजनों ने शव को सुपुर्दगी में लिया और भोपा बस अड्डे के सामने श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कर परिजन वापस लौट गए।
 

परिवार बोला, पुलिस से किया अपराध का खात्मा
चंडीगढ़ के सेक्टर 20 सी में रहने वाले भांजे राजेश कुमार ने कहा कि उनका मामा अपराधी था। पुलिस ने अपराध का खात्मा किया है, अच्छी कार्रवाई की है। वह और उनका परिवार पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट है। उन्होंने शव को मुजफ्फरनगर में ही अंतिम संस्कार कर दिया है। बेटे सुमित ने बताया कि पुलिस कस्टडी से भागने के बाद उसके पिता एक बार आए थे।
 

परिवार ने डरकर छोड़ दिया था घर
एसपी सिटी अृमत जैन ने बताया कि परिजन भी सत्तू से परेशान थे। वह कभी भी किसी पर भी पिस्टल तान देता था। फरवरी माह में पुलिस कस्टडी से भागने से पहले भी वर्ष 2009 में मेरठ से कोर्ट में पेशी के लिए ले जाए जाने पर चंडीगढ़ से पुलिस कस्टडी से भाग गया था। उसके आतंक के कारण परिजनों ने राम दरबार वाला घर छोड़कर अन्य स्थान पर रहना शुरू कर दिया था। पुलिस जांच में सामने आया कि 1996 में वह पंजाब के लिए रणजी ट्रॉफी के दो मुकाबले खेल चुका था। 2001 में अपराध की दुनिया में नाम आ जाने के बाद पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन ने अपने खिलाड़ियों की सूची से उसका नाम हटा दिया था।
 

लूट और दुष्कर्म की धारा बढ़ाई
सिविल लाइन थाना पुलिस ने पहले इस मामले में अपहरण का मामला दर्ज किया था। किशोरी के आने के बाद उसके कोर्ट में बयान दर्ज कराए गए। बयानों के आधार पर दुष्कर्म व लूट की धारा को रिपोर्ट में बढ़ाया गया है। आरोपी ने किशोरी को धमका कर उसकी बाली लूट थी, जो मुठभेड़ के बाद आरोपी से बरामद हुई है। आरोपी ने मुठभेड़ में पांच गोली चलाई थीं। पुलिस की ओर से भी पांच गोली चली थीं। आरोपी ने नौकरी लगवाने के नाम पर ग्रामीण से 11 हजार रुपये लिए थे। इनमें से मुठभेड़ के दौरान 6390 रुपये बरामद हुए हैं। पुलिस अधीक्षक सिटी अमृत जैन ने बताया कि सत्तू से परिवार के लोग भी परेशान थे। पोस्टमार्टम के बाद उन्हें शव सौंप दिया गया है।
 
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ये था मामला
एक सप्ताह पहले सत्तू तितावी पहुंचा था। पीर के पास मिले तितावी निवासी एक ग्रामीण से उसने बेटी की बीमारी का बहाना बनाकर तांत्रिक के बारे में पूछा था। इसके बाद ग्रामीण ने एक तांत्रिक से मिलवाया था। रात होने का बहाना बनाकर वह ग्रामीण के घर पर ठहरा था। सुबह के समय उसने सफाई कर्मचारी के रूप में ग्रामीण की नाबालिग पुत्री व पुत्र की नौकरी लगवाने का झांसा दिया था। वह पिता-पुत्री को कार में बैठाकर मुजफ्फरनगर कचहरी ले गया। वहां ग्रामीण को आधार कार्ड लाने भेजकर किशोरी को अपहरण कर ले गया था। किशोरी को उसने तीन दिन बाद यमुनानगर से रोडवेज बस में बैठा कर भेज दिया था।

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