ज्ञानवापी मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की मांग की है। उन्होंने मुजफ्फरनगर के एसएसपी को पत्र लिखकर अपने आवास पर अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है। न्यायाधीश दिवाकर के अनुसार, उन्हें पहले भी उनके आवास पर सात दिन और दो शिफ्टों में सुरक्षा मिलती रही है, लेकिन वर्तमान में उन्हें केवल दो पीएसओ (निजी सुरक्षा अधिकारी) ही दिए गए हैं।
सुरक्षा घटाए जाने पर जताई चिंता
मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी एवं न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने अपने पत्र में बताया कि बरेली में उनकी तैनाती के दौरान उन्हें दो पीएसओ के साथ-साथ सात दिन के लिए दो शिफ्टों में आवासीय गारद सुरक्षा भी प्राप्त थी। मुजफ्फरनगर में 29 नवंबर 2025 को कार्यभार ग्रहण करने के बाद से उन्हें यह सुविधा नहीं मिल रही है। न्यायाधीश ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियां बरेली की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील हैं, ऐसे में सुरक्षा में कटौती किया जाना बेहद चिंताजनक है।
धमकी भरे पत्र का किया जिक्र
न्यायाधीश दिवाकर ने अपनी पिछली तैनाती, वाराणसी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जून 2022 में उन्हें 'इस्लामिक आगाज मूवमेंट' नामक संगठन से एक धमकी भरा पत्र मिला था। इस पत्र में उन्हें "काफिर बुतपरस्त हिंदू न्यायाधीश" कहकर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई थी। न्यायाधीश ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि उन्हें प्राप्त हुई नई धमकी और पुराने धमकी भरे पत्र की भाषा में काफी समानता है, जो उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता को और बढ़ाती है।
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मुजफ्फरनगर में फांसी की सजा का बनाया रिकॉर्ड
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने पिछले 80 दिन में फांसी की सजा सुनाने का रिकॉर्ड बनाया है। तीन मामलों में अब तक नौ लोगों को फांसी की सजा सुना चुके हैं। एडवोकेट समीर सैफी, भौराकलां थाना क्षेत्र के सिसौली निवासी शेखर, चरथावल के राजेश देवी और उसके मासूम बेटे हिमांशु और राजेंद्र सैनी की हत्या के मामले में नौ दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
अभी नहीं मिला पत्र: एसएसपी
एसएसपी संजय वर्मा का कहना है कि अभी उन्हें इस तरह का कोई पत्र नहीं मिला है। हालांकि पुलिस लाइन से गादर में तीन पुलिसकर्मी और एक गनर पहले ही दिया जा चुका है।