सड़क का प्रयोग करने वाले अन्य लोगों को यातायात के नियमों का पूर्णतया पालन करना चाहिए। दोपहिया वाहन पर हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें। नशा करके वाहन कभी न चलाएं। यदि उनका भाई संदीप हेलमेट लगाए हुए होता और नशा करके वाहन न चलाता तो शायद वह आज अपनों के बीच जीवित होता।
किसी के साथ ऐसा न हो, स्कूल की गलती से उजड़ गया मेरा घर
सड़क दुर्घटना में अपने को खोने का दुख क्या होता है यह बयान करना भी मुश्किल है। स्कूल बस चालक द्वारा बरती गई लापरवाही से हुई एक बच्चे की मौत के दस साल बाद भी उसके पिता की आंखों से आंसू छलक गए।
खतौली कस्बे में इस्लामनगर निवासी पप्पू रिजवी ने बताया कि उनका नौ साल का बेटा हयात जब स्कूल बस से वापस लौटा तो स्कूल बस चालक ने उसके उतरते समय ही बस चला दी। जिस कारण उनका बेटा नीचे गिर गया और घर के सामने ही स्कूल की बस का पिछला पहिया उसके ऊपर से उतर गया था। जिस कारण उनके बेटे की आंखों के सामने ही तड़पते हुए मौत हो गई थी।
वह मंजर जब भी उनकी आंखों के सामने आता है तो उनकी रूह तक काप उठती है। उन्होंने कहा कि स्कूल संचालक अपना फायदा करने के चक्कर में बस में परिचालक नही रखते। वह अकेले ही गाड़ी के स्टेयरिंग पर बैठे हुए बच्चों को उतारता है, जिस कारण हादसे की आशंका बनी रहती है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूली बसों पर परिचालक की नियुक्ति होनी जरूरी है। जो स्कूली वैन चालक परिचालक नही रखते उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।