दिवाली मेले में न दुकानदार, न ग्राहक
मुजफ्फरनगर। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में शामिल दिवाली मेले में यहां न तो दुकानदार आए और न ही ग्राहक दिखाई दिए। यह मेला प्रशासन की मात्र औपचारिकता बनकर रह गया। दिन में इस मेले में चार दुकान खुली थी, तो रात में यह संख्या आठ हो गई।
स्थानीय निकाय की उपनिदेशक रश्मि सिंह ने दिवाली मेले को लेकर 21 अक्तूबर को जारी पत्र में दिशा निर्देश दिए थे। मेले को लेकर स्थानीय निकाय के साथ अन्य विभागों को भी जिम्मेदारी दी गई थी। मेले का उद्देश्य पटरी दुकानदारों की अतिरिक्त आय कराना था। डूडा के स्वयं सहायता समूहों को मौका देना था।
यहां दुकान के लिए कुल 16 जगह छोड़ी गई, जिनमें आठ दुकानें पूरी तरह खाली हैं। 27 अक्तूबर की शाम प्रदेश के राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल, डीएम सीबी सिंह और एडीएम प्रशासन अमित सिंह इस मेले का शुभारंभ किया।
पालिका ईओ हेमराज सिंह का कहना है कि तीन दिन का मेला लगाना था, मेले की स्थिति के बारे में इसलिए जानकारी नहीं है। मैं उड़ीसा में ट्रेनिंग में हूं।
एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि प्रशासन ने दुकानदारों को बुलाने का प्रयास किया, लेकिन दुकानदार पहले से ही अपनी जगह सैट है, इसलिए नहीं आए हैं।
पालिका के साथ कई विभागों को जिम्मेदारी
नगर पालिका के साथ मेले में सहयोग के लिए पुलिस, विद्युत, लोक निर्माण, सूचना एवं जनसंपर्क, संस्कृति, परिवहन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को भी जिम्मेदारी दी गई थी। डीएम को इन सबके साथ बैठक करने के लिए कहा था।
इन लोगों की लगी दुकान
दिवाली मेले में जो आठ दुकान लगी हैं उनमें रॉयल स्वयं सहायता समूह की ठाकुर जी की ड्रेस एवं श्रंगार का सामान है। जस मॉ जगदंबे समूह के सुनील धनगर ने कंबल और जैकेट की दुकान लगाई है। नफीस ने सिरेमिक बर्तन एवं हाथी घोडे़ के सजावटी सामान की, सफीक ने टार्च सेविंग के इलेक्ट्रानिक आइटम की दुकान लगाई है। एक महिला की आचार की दुकान है। इनके अलावा एक बर्गर और एक आइसक्रीम की दुकान है।
मुजफ्फरनगर के नुमाईश मैदान में खाली पडे दीपावली मेला का तंबू।- फोटो : MUZAFFARNAGAR