उन्होंने बताया कि छात्र डरते हुए छिप गया। काफी कोशिश के बाद भी छात्र से बात नहीं हो सकी। करीब 35 मिनट तक टीम पीड़ित के घर पर ही रही। इसके बाद दोनों चिकित्सकों ने छात्र के पिता इरशाद से बच्चे को समझाने की बात कही।
चिकित्सकों ने इरशाद से कहा कि वह बच्चे को समझाएं कि यह सब बातें दिमाग से निकाल दे, क्योंकि माता-पिता के समझाने से बच्चा जल्दी समझता है। चिकित्सकों ने पीड़ित परिवार को अगली बार जिला चिकित्सालय में ही आने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस बात से भी फर्क पड़ता है कि टीम उनके घर पर पहुंच रही है। जब बच्चा गांव से बाहर जाएगा तो उसका दिमाग डायवर्ट होगा।
सुप्रीम कोर्ट कर रहा सुनवाई
पिछले महीने 24 अगस्त को अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र की पिटाई के बाद वीडियो वायरल हो गया था। महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में प्रकरण की सुनवाई चल रही है। बच्चे का अभी तक प्रवेश नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई थी। बीएसए शुभम शुक्ला से भी जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी।
यह था पूरा मामला
खुब्बापुर गांव के स्कूल में शिक्षिका तृप्ता त्यागी ने पांच का पहाड़ा नहीं सुनाने पर अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र की सहपाठियों से पिटाई करा दी थी। इसी दौरान जातीय टिप्पणी का भी आरोप है। प्रकरण के दौरान पीड़ित छात्र के चचेरे भाई ने वीडियो बना लिया। वीडियो के वायरल होते ही देशभर से प्रतिक्रियाएं आने लगीं और शिक्षिका की गिरफ्तार की मांग उठने लगी। आरोपी शिक्षिका पर अब एफआईआर दर्ज हो गई है। खुब्बापुर गांव के पीड़ित छात्र का अभी तक किसी स्कूल में प्रवेश नहीं हो सका है। जमीयत उलमा ने छात्र के घर पर शिक्षक भेजकर पढ़ाई शुरू करा दी है।
सरकार मदद करे तो करा सकते हैं पढ़ाई
छात्र के पिता इरशाद का कहना है कि उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दो स्कूलों के नाम दिए हैं। इनमें जिला मुख्यालय का शारदेन पब्लिक स्कूल और होली एंजल्स पब्लिक स्कूल है। अगर सरकार मदद करेगी तो इन दोनों स्कूलों में बच्चे को पढ़ा सकते हैं। पीड़ित ने कहा कि हम किसान हैं, निजी खर्च पर इन स्कूलों में पढ़ाना आसान काम नहीं होगा। यहां बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए सरकार की मदद की जरूरत पड़ेगी।
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